कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि शिकायत निवारण का दायरा शिकायतों के निपटारे तक ही सीमित नहीं होना चाहिए तथा पेंशनभोगियों की आकांक्षाओं और चिंताओं का समाधान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। डॉ. सिंह ने कहा कि पेंशन संबंधी विवादों का समाधान प्रशासनिक तौर पर किया जाना चाहिए ताकि पेंशनभोगियों को अदालत जाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़े। उन्होंने आज नई दिल्ली में पेंशन संबंधी मुकदमेबाजी पर दूसरी राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। डॉ. सिंह ने कहा कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने कई नागरिक केंद्रित सुधार किये हैं। विभाग ने पारदर्शिता और कुशलता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्रणाली के जरिए डिजिटलीकृत पेंशन सेवाएं शुग्रू की हैं।
इस अवसर पर अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने शून्य पेंशन मुकद्मेबाजी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले मुकद्मेबाजी के बजाय बेहतर नीति कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी और संस्थागत तंत्रों के जरिए विवादों का समाधान किया जाना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अनिवार्य मुकद्मों में कमी पेंशन प्रणाली में लोगों के विश्वास को मजबूत करेगी तथा पेंशनभोगियों के लिए समय पर न्याय सुनिश्चित हो सकेगी।