रायपुर
। शकुंतला
फाउंडेशन छत्तीसगढ़ और इटसा हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में रायपुर में आशा
कार्यकर्ताओं, मितानिन
दीदियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन
किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को
प्रशिक्षित और सशक्त बनाना था, ताकि गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
कार्यशाला
के दौरान मितानिन दीदियों को बीपी, शुगर और हीमोग्लोबिन जांच जैसे आवश्यक
स्वास्थ्य परीक्षणों की प्रायोगिक जानकारी दी गई। इसके साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों
की टीम ने मातृ स्वास्थ्य, नवजात
शिशु देखभाल, क्षय
रोग, कैंसर
के शुरुआती लक्षण और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
विशेषज्ञों की टीम में डॉ. जयेश शर्मा, तुषार जैन, डॉ. अर्चना राय, डॉ. जील सेठ अग्रवाल, डॉ. गार्गी पांडे और डॉ. ईशिका जायसवाल शामिल रहे।
कार्यशाला में प्रतिभागियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का लाइव डेमो भी दिया
गया, ताकि हार्ट अटैक या बेहोशी जैसी
परिस्थितियों में वे तुरंत सहायता प्रदान कर सकें।
इस अवसर पर
सीईओ त्रिपाठी, शकुंतला फाउंडेशन की अध्यक्ष
श्रीमती स्मिता सिंह, सीएसआर मैनेजर मुस्कान खंडेलवाल, पदमा घोष, नीता विश्वकर्मा, सौहदरा पठारी, उर्वशी कौशिक सहित अस्पताल के चिकित्सकगण उपस्थित
रहे।
कार्यशाला
में चंदखुरी, अमलेश्वर, खुडमुडा, धुधवा, रायपुर, कापसी डीह और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में आशा
कार्यकर्ता, मितानिन दीदी और आंगनबाड़ी
कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
शकुंतला
फाउंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती स्मिता सिंह ने कहा कि “सशक्त नारी, सशक्त भारत” की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से
यह आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि मितानिन दीदी ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़
हैं और उन्हें प्रशिक्षित करना पूरे गांव को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम
है।कार्यशाला
का समापन “मितानिन होही प्रशिक्षित, पूरा गांव होही सुरक्षित” के संकल्प के साथ किया गया।