हाइड्रोजन ट्रेन...आत्मनिर्भर भारत के लिए आज बड़ा दिनः प्रधानमंत्री मोदी

Posted on: 2026-07-17


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नई दिल्ली, 17 जुलाई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज राष्ट्र को पहली हाइड्रोजन ट्रेन समर्पित करने से पहले अपने एक्स हैंडल पर बधाई दी। उन्होंने लिखा, '' आज भारत को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिलने का सपना साकार होने जा रहा है। यह आत्मनिर्भर भारत और सतत विकास की दिशा में एक बहुत बड़ा दिन है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बहुत बधाई देता हूं।''

उन्होंने सुभाषितम् भी साझा किया- प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति। सर्वारम्भेण तत् कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते।। यह चाणक्य नीति के छठे अध्याय का 16वां श्लोक है। इसमें चाणक्य ने सिंह (शेर) से सीखे जाने वाले एक सबसे महत्वपूर्ण गुण का वर्णन किया है। इसका अर्थ है मनुष्य जो भी कार्य करना चाहता है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, उसे पूरी शक्ति और लगन के साथ शुरू करना चाहिए। शेर से हमें यही एक गुण सीखना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री आज सुबह लगभग 11 बजे हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन पर जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ट्रेन भारत में ही डिजाइन की गई है। इंजीनियरिंग और एकीकृत की गई यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है। इसके साथ ही आज भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिनके पास हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें परिचालन में हैं।

यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलती है, जो हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित करके ट्रेन को आगे बढ़ाती है। इस प्रक्रिया में केवल जल वाष्प उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप रेल संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है। डीजल ट्रेनों की तुलना में ये ट्रेनें टेलपाइप उत्सर्जन को खत्म करती हैं। जीवाश्म ईंधन और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम करती हैं और शोर भी काफी कम करती हैं। ये ट्रेनें पर्यावरण को लेकर स्वच्छ और कुशल समाधान बन जाती हैं। इस ट्रेन में 10 कोच हैं। इस तरह यह अब तक विकसित की गई सबसे लंबी हाइड्रोजन-चालित यात्री ट्रेनों में से एक बन गई है।