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नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। भारत के योगासन ने ब्रिक्स पारंपरिक एवं स्वदेशी प्रदर्शन खेल 2026 में चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित भाग लेने वाले देशों के प्रतिनिधियों को खासा प्रभावित किया। अहमदाबाद के वीर सावरकर खेल परिसर में आयोजित इस एकदिवसीय आयोजन में 10 देशों के करीब 160 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यहां विभिन्न देशों के पारंपरिक खेलों, सांस्कृतिक विरासत और खेल कौशल का अनूठा संगम देखने को मिला।
आयोजन में चीन के वुशू का जोशीला प्रदर्शन, भारत के मल्लखंभ की हैरतअंगेज कलाबाजियां, कजाखस्तान के तोगुजकुमालक का शांत और एकाग्रता से भरा खेल तथा ब्राजील के जिउ-जित्सु का ध्यानपूर्ण प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहे। हालांकि, इन विभिन्न खेलों के बीच योगासन ऐसा माध्यम बनकर उभरा, जिसने सभी देशों के प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा।
भारत ने मल्लखंभ और कलारीपयट्टू के साथ योगासन का भी प्रदर्शन किया। वर्ष 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने वाला अहमदाबाद इस वर्ष जून में पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप का भी आयोजन कर चुका है। इस वैश्विक प्रतियोगिता में 79 देशों के 522 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें अफ्रीकी देशों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही।
दक्षिण अफ्रीका और चीन ने की योगासन की सराहना
दक्षिण अफ्रीका के दल प्रमुख फिलासांडे मकविली ने साई मीडिया से बातचीत में कहा, “दक्षिण अफ्रीका में योग उन गतिविधियों में शामिल है, जिनका इस्तेमाल लोग शरीर और मन को तरोताजा करने, तनाव कम करने तथा शरीर की गतिविधियों और लचीलेपन को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। हम इसे अपनाते हैं और पसंद करते हैं। इसके लिए शरीर से काफी मेहनत करनी पड़ती है। फिर भी, दक्षिण अफ्रीका में जो लोग योग का आनंद लेते हैं, वे इसका रोजाना अभ्यास करते हैं।”
चीन के दल प्रमुख यी लियू ने भी योगासन के प्रति उत्साह जताया। उन्होंने कहा, “आज हमने योग के बारे में बहुत कुछ देखा और सीखा। कल अभ्यास के दौरान भी हमने छोटे बच्चों को अद्भुत गतिविधियों का अभ्यास करते देखा। हम इसके बारे में और बहुत कुछ सीखना चाहते हैं।”
मल्लखंभ के प्रदर्शन पर झूमे दर्शक
सोमवार को वीर सावरकर खेल परिसर में मौजूद करीब तीन हजार दर्शक उस समय उत्साह से झूम उठे, जब भारत के युवा खिलाड़ियों ने मल्लखंभ का ऊर्जावान प्रदर्शन किया। इससे पहले भारतीय दल ने लयबद्ध योगासन का आकर्षक प्रदर्शन किया था।
जून में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने कुल 114 पदक जीते थे, जिनमें 102 स्वर्ण पदक शामिल थे। इस प्रदर्शन ने प्रतियोगिता में भारत के दबदबे को दर्शाया। चैंपियनशिप में कुल 31 देशों ने कम से कम एक पदक जीता, जबकि 10 देश कम से कम एक स्वर्ण पदक हासिल करने में सफल रहे। यह योगासन की खेल के रूप में बढ़ती लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय पहुंच को भी दर्शाता है।
खेलों के साथ दोस्ती और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
ब्रिक्स खेलों में पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन के साथ देशों के खिलाड़ियों के बीच आपसी मेलजोल भी देखने को मिला। खिलाड़ियों ने एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और अपने खेलों की बारीकियां साझा कीं। इसी क्रम में चीन के एक वुशू खिलाड़ी ने मुख्य मंच से दूर भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, नारायणपुरा के वुशू खिलाड़ियों को इस खेल की कुछ तकनीकें सिखाईं।
चीन के दल प्रमुख लियू ने भारत में मिले आतिथ्य की सराहना करते हुए कहा, “मैंने अपने दल के सभी सदस्यों से बात की। सभी ने कहा कि भारत में उन्हें जितना गर्मजोशी भरा स्वागत मिला, वैसा पहले कभी महसूस नहीं किया। हम आधी रात को हवाई अड्डे पहुंचे थे, वहां भी हमारा स्वागत करने के लिए एक नृत्य समूह मौजूद था, जो बेहद प्रभावशाली था। नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन शानदार था, जिसमें स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्वाद शामिल थे। हमने डोसा भी खाया, जो हमारे लिए काफी दिलचस्प अनुभव था। सभी ने भारत में अपने प्रवास का आनंद लिया और यह यात्रा उनके जीवन की यादगार यात्राओं में शामिल रहेगी।”
रूस के प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख ज़्लाता याकोवलेवा ने भी आयोजन और भारतीय मेजबानी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “इतने शानदार आयोजन के लिए हमें आमंत्रित करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद। यह अनुभव अविश्वसनीय था। भारतीय पक्ष का आतिथ्य शानदार है। हमने होटल, आयोजन के सभी स्थलों और वहां की व्यवस्थाओं का भरपूर आनंद लिया। मेरे लिए सबसे खास और पसंदीदा पहलू ब्रिक्स देशों के बीच दोस्ती है। ऐसे आयोजनों में एक साथ हिस्सा लेना हमें बहुत अच्छा लगता है।”
दस देशों के पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन
पहली बार आयोजित ब्रिक्स पारंपरिक एवं देशज प्रदर्शन खेलों में भारत का 50 सदस्यीय दल सबसे बड़ा था। चीन से 30, ईरान से 22 और दक्षिण अफ्रीका से 14 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कुल 10 देशों के करीब 160 प्रतिभागियों ने इस आयोजन में अपनी पारंपरिक खेल विधाओं का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में बेलारूस के गोरोदकी; बोलीविया के लूचा दे चोलितास और तिंकू; ब्राजील के ब्राजीलियाई जिउ-जित्सु और कैपोइरा; चीन के लायन डांस, वुशू और हेल्थ चीगोंग; ईरान के ज़ोरखानेह, हफ्त संग और घानियेह; कजाखस्तान के असिक अतु, तोगुजकुमालक और कजाख कुरेश; रूस के साम्बो और गोरोदकी; दक्षिण अफ्रीका के कगाती और इंटोंगा; संयुक्त अरब अमीरात के अलतब्बाह तथा भारत के मल्लखंभ, योगासन और कलारीपयट्टू का प्रदर्शन किया गया।
इस आयोजन ने पारंपरिक खेलों के माध्यम से विभिन्न देशों की सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के साथ-साथ आपसी मित्रता, सीखने और खेलों के जरिए सहयोग को भी मजबूत किया।