SEMICON India 2026: भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में बढ़ी वैश्विक उद्योग और शिक्षा जगत की दिलचस्पी

Posted on: 2026-09-17


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भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में वैश्विक उद्योग और शिक्षा जगत की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। SEMICON India 2026 के दौरान भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार, उद्योग-अकादमी सहयोग, देश में चिप निर्माण और कार्यबल प्रशिक्षण को प्रमुख क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया, जिनसे देश का सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र और मजबूत हो सकता है। गुरुवार को आयोजन स्थल पर प्रतिभागियों ने बताया कि कंपनियां भारतीय बाजार में नए अवसर खोज रही हैं, जबकि शिक्षण संस्थान चिप डेवलपमेंट, उद्योग के साथ साझेदारी और सेमीकंडक्टर से जुड़ी स्किल्स विकसित करने की दिशा में सक्रिय प्रयास कर रहे हैं।

शिक्षा संस्थानों में चिप निर्माण की शुरुआत

गायत्री विद्या परिषद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर डॉ. मनमधा राव ने बताया कि उनका संस्थान ‘भारत सिलिकॉन लैब्स’ के माध्यम से सिलिकॉन चिप बनाने पर काम कर रहा है और एक माइक्रोकंट्रोलर भी विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा, “हम अपनी ‘भारत सिलिकॉन लैब्स’ में सिलिकॉन चिप बनाने जा रहे हैं… हम एक माइक्रोकंट्रोलर पर भी काम कर रहे हैं… पहली बार अकादमी की तरफ से कोई चिप बनाई जा रही है… हम इस मौके के लिए शुक्रगुजार हैं कि बातचीत के जरिए हम अपने ज्ञान को और बढ़ा सकते हैं और समाज व इंडस्ट्री के इनोवेटर्स से मिल सकते हैं।”

वैश्विक कंपनियों की भारत में बढ़ती रुचि

इस आयोजन में शामिल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भी भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई। जापान की इनाबाता एंड कंपनी के कोइची यामामूरा ने कहा कि उनकी कंपनी, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में जहरीली ग्रीनहाउस गैसों और विस्फोटक गैसों को कम करने के लिए लोकल स्क्रबर बनाती है, पहली बार भारतीय बाजार में कदम रख रही है। उन्होंने कहा, “…यह भारतीय बाजार में हमारा पहला कदम है और हमें कुछ कस्टमर मिलने और इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाने की काफी उम्मीदें हैं…” सिंगापुर की आईएक्यू टेक्नोलॉजी इंटरनेशनल के हिंग की नियोह ने कुशल कार्यबल तैयार करने और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह बात समझ में आती है कि दुनिया के बाकी देशों की बराबरी करने के लिए भारत को अब तेजी से इस बदलाव से गुजरना होगा। इसलिए बदलाव के मकसद को लेकर बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं। मुझे लगता है कि यह उस मुकाम तक पहुंच पाएगा।”

अकादमिक प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों के बीच पुल

गायत्री विद्या परिषद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के जे. भास्कर राव ने अकादमिक प्रशिक्षण और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच के अंतर को कम करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, “अक्सर छात्रों को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से प्रोजेक्ट्स पर काम करने के पर्याप्त मौके नहीं मिलते। इस कमी को दूर करने के लिए हमने एक लैब बनाई है, जहां छात्र इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट्स में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकते हैं और प्रैक्टिकल अनुभव हासिल कर सकते हैं…” उन्होंने आगे कहा, “हमारा मकसद इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ सहयोग को मजबूत करना है। हम इंडस्ट्री के प्रोफेशनल्स को अपनी लैब में बुलाना चाहते हैं, ताकि वे हमारे छात्रों और उनके हुनर को देख सकें और सार्थक बातचीत के मौके बन सकें। इससे हमारे छात्रों को बेहतर करियर के मौके और प्लेसमेंट पाने में मदद मिलेगी।”