माओवाद के साए से मुक्त होने के बाद पहली बार आयोजित होने जा रहे बस्तर ओलंपिक 2026-27 को लेकर अंचल में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। अपने सफल आयोजनों के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुके इस महत्वाकांक्षी खेल महाकुंभ की रूपरेखा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा तैयार कर ली गई है। बस्तर संभाग के कमिश्नर श्री डोमन सिंह ने संभाग के सभी खेल अधिकारियों को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कमिश्नर ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की , जिसमें उप आयुक्त गीता रायस्त और खेल अधिकारी श्री सुशांत पाल भी उपस्थित थे। बस्तर ओलम्पिक के लिए इस साल बीते वर्ष से दुगुना लक्ष्य निर्धारित कर पंजीयन किए जाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में कमिश्नर ने कहा कि नक्सलमुक्त परिवेश बनने के बाद अब उन खेल प्रतिभाओं को खुलकर सामने लाने का ऐतिहासिक अवसर है, जो पूर्व में नक्सली भय और खौफ के कारण अपनी प्रतिभा दबाए बैठी थीं। शासन का मुख्य ध्येय अंदरूनी वनांचल गांवों में छिपी नैसर्गिक प्रतिभाओं को निखारकर मुख्यधारा से जोड़ना और प्रशासन व जनता के बीच मजबूत विश्वास कायम करना है। संभाग के सातों जिलोंकृबस्तर, कांकेर, कोण्डागांव, नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ाकृमें कुल ग्यारह खेल विधाओं में यह स्पर्धा तीन स्तरों पर आयोजित की जाएगी। जारी समय-सारणी के अनुसार खिलाडि़यों के पंजीयन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 तक चलेगी, जिसके बाद 1 से 13 नवंबर 2026 तक विकासखंड स्तरीय मुकाबले होंगे। ब्लॉक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी 16 से 25 नवंबर 2026 के मध्य जिला स्तरीय स्पर्धाओं में दम दिखाएंगे और अंततः 7 से 11 दिसंबर 2026 तक संभाग स्तरीय भव्य मुकाबलों का आयोजन किया जाएगा।
कमिश्नर श्री डोमन सिंह ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि बस्तर ओलंपिक के प्रति क्षेत्र के युवाओं का आकर्षण और उत्साह वर्ष-दर-वर्ष निरंतर बढ़ रहा है, इसलिए दूर-दराज के अंदरूनी ग्रामीण अंचलों के प्रत्येक गांव से शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जाए। खिलाडि़यों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से पंजीयन की सरल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। प्रतियोगिता के निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित संचालन के लिए ब्लॉक व जिला स्तर पर विशेष आयोजन समितियों के गठन तथा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तय समय-सीमा के भीतर गांव-गांव तक सघन प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा गया है, विशेष तौर पर बैनर पोस्टर, दीवार लेखन और मुनादी के माध्यम से अंदरूनी इलाकों में प्रचार प्रसार किया जाए, इसके साथ ही सोशल मीडिया से भी लोगों को अवगत कराया जाए, ताकि शांति के नए दौर में वनांचल की सभी प्रतिभा इस मंच से वंचित जुड़ सकें।