नई दिल्ली, 31 अगस्त मीर यार बलोच, बलोचिस्तान के सक्रिय स्वतंत्रता समर्थक, लेखक, पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं ‘आजाद बलोच आंदोलन’ के प्रतिनिधि हैं। वे लंबे समय से बलोंचों के अधिकारों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठा रहे हैं। वह मई 2025 में बलोचिस्तान को स्वतंत्र देश घोषित कर चुके हैं। प्रस्तुत है, वरिष्ठ संवाददाता सौरव राय से उनकी बातचीत के संपादित और प्रमुख अंश...
प्रश्न-बलोच संगठनों के स्वतंत्र बलोचिस्तान की मांग का मौजूदा राजनीतिक आधार क्या है। आपको जनता का कितना समर्थन हासिल है?
उत्तर- बलोचिस्तान, पाकिस्तान से हजारों साल पुराना देश है। इसकी अपनी अलग पहचान, इतिहास, भाषा, जीवनशैली, कानून, भौगोलिक क्षेत्र और दुनिया के साथ कूटनीतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक संबंध रहे हैं। दुनिया को यह सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए। अगर किसी को लगता है कि बलोचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने से क्षेत्र में अस्थिरता, अराजकता या आर्थिक एवं सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा होंगे, तो वह हमारे मूल्यों, सहिष्णुता, शांतिप्रिय स्वभाव और भौगोलिक स्थिति को नहीं समझता। या फिर वे पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रचार और दावों से प्रभावित है। बलोचों ने वहां मौजूद पाकिस्तानी सेना को पूरी तरह नकार दिया है। वह कई इलाकों में सिमट गई है। जमीनी हालात पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। बलोचिस्तान में स्वतंत्रता समर्थक सुरक्षाबल सक्रिय हैं। वह प्रमुख सड़कों एवं इलाकों पर अपना प्रभाव रखते हैं। आम लोग उन्हें अपने रक्षक और मुक्तिदाता के रूप में देखते हैं। वहीं, पाकिस्तानी सेना देखकर लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते हैं। पाकिस्तान पहले ही लड़ाई हार चुका है। बलोंचों के अंदर एक ‘खामोश क्रांति’ है।
प्रश्न-पाकिस्तान का कहना है कि बलोच अलगाववादी गतिविधियों के पीछे विदेशी शक्तियों का हाथ है। खास तौर पर भारत पर आरोप लगाए जाते हैं। आप क्या कहेंगे?
उत्तर-सबसे पहले, बलोचों को अलगाववादी कहना गलत है। उनका अपना अलग देश है, जो क्षेत्रफल में फ्रांस से भी बड़ा है। हम पाकिस्तान के कब्जे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार अपने अधिकार मांग रहे हैं। पाकिस्तान सरकार और सेना के बयानों पर भरोसा करना समय की बर्बादी है। उसका इतिहास झूठ, धोखे और तथ्यों को छिपाने का है। उसने अमेरिका एवं पश्चिमी देशों से आर्थिक और सैन्य सहायता ली तथा बाद में अपने हितों के लिए उसका इस्तेमाल किया। पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई प्रमुखों एवं रक्षा मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने अमेरिका से सहायता ली और अफगानिस्तान में अपने हित साधे। अंतरराष्ट्रीय समुदायों को इन आरोपों को गंभीरता से लेन चाहिए। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय समुदाय या भारत हमें सहायता देता है, तो स्वतंत्रता समर्थक बल एक साल के भीतर पाकिस्तानी सेना को वहां से बाहर निकाल देंगे।
प्रश्न-क्या आप चाहते हैं कि भारत औपचारिक रूप से बलोचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता दे?
उत्तर- हमारी नेतृत्वकारी संस्थाओं ने अपने नीतिगत बयानों में साफ तौर पर कहा है कि वे बलोचिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन के लिए भारत से कूटनीतिक, राजनीतिक एवं नैतिक समर्थन चाहते हैं। बलोचिस्तान पाकिस्तान का हिस्सा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र देश है। हम पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों या नेताओं से पूछकर अपनी नीतियां बनाने के लिए बाध्य नहीं हैं। बलोचों का मानना है कि नई दिल्ली को अब खुले तौर पर बलोचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देनी चाहिए। दोनों के बीच लंबे समय के रक्षा और आर्थिक सहयोग पर बातचीत होनी चाहिए। भारतीय तकनीकी कंपनियों एवं बड़े उद्योगों से जुड़े निवेशकों को बलोचिस्तान के साथ रक्षा और आर्थिक परियोजनाओं पर काम शुरू करना चाहिए। इससे भारत एक जिम्मेदार एवं भरोसेमंद साझीदार के रूप में बलोचिस्तान के बंदरगाहों और राष्ट्र निर्माण की परियोजनाओं में सहयोग कर सकता है। अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपने हितों के लिए मदद मांग सकता है, तो बलोचिस्तान को भी दुनिया एवं भारत जैसे पड़ोसी देश से अपने संसाधनों और स्वतंत्रता के मुद्दे पर संपर्क करने का अधिकार है। हमारे यहां तेल, गैस, सोना-चांदी और अन्य कई महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध हैं। हम दुनिया से केवल मदद नहीं मांग रहे हैं, बल्कि साझीदारी और व्यापार के लिए आमंत्रित भी कर रहे हैं।
प्रश्न-हाल में पाकिस्तानी सैन्य अभियानों के दौरान कई आम नागरिक मारे गए। आप अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने क्या सबूत रख रहे हैं?
उत्तर-बलोचों के खिलाफ पाकिस्तानी कार्रवाई को केवल आरोप नहीं कहा जा सकता। हमारे पास इसके सबूत हैं। हाल में बोलान क्षेत्र से तीन युवा बलोचों को पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने हिरासत में लिया और शव सुनसान इलाकों में मिले। 1948 से अब तक करीब दो लाख बलोचों की मौत हुई है। लगभग 50 हजार बलोचों को जबरन उठाकर लापता किया गया। 23 वर्षीय नसीबुल्लाह बलोच (अली मुराद के बेटे) जो क्वेटा के वेस्टर्न बाईपास स्थित किली सरदार कारेज के निवासी हैं, को 28 जुलाई को सुबह करीब चार बजे उनके घर से हिरासत में लिया। आज तक कोई जानकारी नहीं है। केच जिले के पेदराक निवासी जाहिर बलोच को 24 अगस्त को तुर्बत जाते समय हिरासत में लिया अभी तक उनका पता नहीं है। पाकिस्तान सैन्य जनसंपर्क विभाग ने कहा है कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच बलोचिस्तान में लगभग 90 हजार सैन्य अभियान चलाए गए। यानी औसतन प्रतिदिन करीब 200 अभियान। पिछले दिनों भी पाकिस्तानी सेना ने बताया कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 31,080 अभियान चलाए गए। आसिम मुनीर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने कहते हैं कि बलोचिस्तान की आजादी के लिए सिर्फ 1500 लोग सशस्त्र संघर्ष कर हैं। फिर हजारों सैन्य अभियानों क्यों की गई हैं। इतनी अधिक संख्या में सैन्य अभियान बताता है कि बलोचिस्तान का संघर्ष बहुत व्यापक है। सैन्य कार्रवाई के बावजूद बलोचिस्तान का स्वतंत्रता आंदोलन समाप्त नहीं किया जा सकता।
प्रश्न-आपका संघर्ष या कथित स्वतंत्रता आंदोलन, उसे हिंसा के चक्र से बाहर निकालने का रास्ता क्या है?
उत्तर- बलोचिस्तान में मौजूद पाकिस्तानी सेना एक बाहरी और अवैध रूप से तैनात ताकत है। वह बलोच जनता की सहमति से वहां मौजूद नहीं है। बलोचिस्तान की आजादी का समर्थन करने वाली ताकतें बलोचों के जीवन, संपत्ति, संसाधनों एवं पहचान की रक्षा कर रही हैं। इसलिए उन्हें ही बलोचिस्तान की वास्तविक सुरक्षा ताकत के रूप में देखना चाहिए। हम चाहते हैं कि दुनिया बलोचिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करे और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुने। हमारा लक्ष्य है कि बलोच अपने भविष्य और क्षेत्र के राजनीतिक मामलों का फैसला अपनी इच्छा से कर सकें।
प्रश्न- क्या बलोचिस्तान के सभी राष्ट्रवादी एवं आजादी समर्थक संगठन एक साझा राजनीतिक नेतृत्व और समान रोडमैप पर सहमत हैं या अभी भी मतभेद हैं?
उत्तर-राजनीतिक और प्रतिरोध से जुड़े संगठनों के बीच एक स्वतंत्र बलोचिस्तान की मांग को लेकर व्यापक सहमति है। अगर किसी संगठन की प्रशासनिक या अन्य मुद्दों पर अलग राय है, तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए, बशर्ते वह एक स्वतंत्र और एकजुट बलोचिस्तान के लक्ष्य में बाधा न बने। यदि कोई संगठन इस नीति से समझौता करता है, तो वह बलोच जनता के बीच अपना भरोसा और समर्थन खो सकता है। आंदोलन में एक साझा और स्वीकार्य नेतृत्व होना महत्वपूर्ण है। बलोच स्वतंत्रता आंदोलन में हिरबयार मर्री को व्यापक रूप से स्वीकार्य नेता हैं। उन्होंने अपना जीवन बलोचिस्तान की आजादी और बलोच आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने में लगाया है। हमें विश्वास है कि बलोच आंदोलन पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने के लिए मर्री अन्य नेताओं के साथ मिलकर संगठनों को एकजुट करने में सफल होंगे।
प्रश्न- अगर भविष्य में एक स्वतंत्र बलोचिस्तान बनता है, तो उसका राजनीतिक मॉडल कैसा होगा?
उत्तर- बलोच आंदोलन को लेकर विभिन्न विचार रखने वाले नेताओं को एक मंच पर लाने के व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। फ्री बलोचिस्तान मूवमेंट के अध्यक्ष हिरबयार मर्री ने कुछ वर्ष पहले बलोचिस्तान लिबरेशन चार्टर पेश किया था। उसमें एक स्वतंत्र एवं एकजुट बलोचिस्तान का रोडमैप है। चार्टर का बलोची, अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, पंजाबी, गुजराती, फारसी, पश्तो एवं अरबी सहित 11 भाषाओं में अनुवाद किया गया है। उसमें बलोचिस्तानी समाज के विभिन्न वर्गों जैसे पत्रकारों, प्रोफेसरों, इतिहासकारों, डॉक्टरों, सामाजिक एवं राजनीतिक नेताओं, छात्र नेताओं, किसानों, व्यापारियों और आम बलोचों के विचार शामिल किए गए हैं। चार्टर के अनुसार, बलोचिस्तान एक लोकतांत्रिक देश होगा, जहां महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे। हिंदू, सिख, जैन, ईसाई, यहूदी एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी होगी। धर्म को राजनीति से अलग रखा जाएगा। सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों पर बलूचिस्तान गणराज्य का नियंत्रण होगा, जिनका इस्तेमाल बलोचों के कल्याण और समृद्धि के लिए होगा। इस दस्तावेज को बलोचिस्तान के लोगों ने व्यापक रूप से सराहा और स्वीकार किया है।
प्रश्न-बलोचिस्तान, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) और ग्वादर जैसी रणनीतिक परियोजनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। आप इन परियोजनाओं और चीन के साथ संबंधों को कैसे देखते हैं?
उत्तर-चीन के लिए बलोच पक्ष का संदेश स्पष्ट है कि वह बलोचिस्तान से जुड़े उन सभी व्यापारिक समझौतों को तुरंत समाप्त करे, जो पाकिस्तान के साथ अप्रत्यक्ष तरीके से किए गए हैं। बलोचिस्तान के छह करोड़ लोगों ने (सीपेक) को खारिज कर दिया है। हर बलोच विकास चाहता है। इसका विरोध इसलिए हो रहा है, क्योंकि चीन ने पाकिस्तान के जरिए इस परियोजना की नींव रखी। चूंकि बलोचिस्तान एक अलग देश है, इसलिए चीन को उसकी स्वतंत्र स्थिति, क्षेत्रीय अखंडता और इतिहास को ध्यान में रखना चाहिए। चीन को यह परियोजना पूरी तरह रोक देनी चाहिए। या फिर बलोचिस्तान गणराज्य को मान्यता देकर उसके साथ दो स्वतंत्र देशों की तरह नए सिरे से समझौते करने चाहिए। पाकिस्तान को बलोचिस्तान के लिए परियोजनाएं तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। बलूचिस्तान जल्द ही बलूचिस्तान वर्ल्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के नाम से बड़ी परियोजनाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। उसकी लागत लगभग 500 अरब डॉलर होगी। ग्वादर के अतिरिक्त बलूच तट पर 10 और विश्वस्तरीय समुद्री बंदरगाह बनाने की योजनाओं पर चर्चा चल रही है। हर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 15 अरब डॉलर बताई गई है। पूरे बलोचिस्तान को रेल और सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
प्रश्न- अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जल्द मान्यता नहीं मिलती है, तो आपका राजनीतिक और कूटनीतिक रोडमैप क्या होगा?
उत्तर- कई दशकों के कूटनीतिक प्रयासों के बाद बलोचिस्तान अब वह दुनिया को समझा सकता है कि विकास और व्यापार के लिए सबसे पहले शांतिपूर्ण माहौल जरूरी है। निवेशकों के पैसे की सुरक्षा एवं शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना बलोचिस्तान गणराज्य की जिम्मेदारी होगी। पाकिस्तानी सेना वहां खुद सुरक्षित नहीं है, तो वह चीन, अमेरिका, बैरिक गोल्ड या दूसरे वैश्विक कारोबारियों और निवेशकों को कैसे सुरक्षित माहौल देगी? दुनिया अब तेजी से स्वतंत्र बलोचिस्तान को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वे पाकिस्तान को बलोचिस्तान पर कब्जा करने वाला बाहरी देश बताते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी बलोचिस्तान से जुड़े समझौते पाकिस्तान से करना चाहिए। हम दुनिया को स्पष्ट बताना चाहते हैं कि बलोचिस्तान अब एक स्वतंत्र देश है। वह अपनी जमीन, हवाई क्षेत्र और समुद्री सीमाओं में पाकिस्तानी हस्तक्षेप स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।