अमरीका में भारतीय समुदाय के एक एडवोकेसी ग्रुप ने अमरीकी कांग्रेस और संयुक्त राज्य अमरीका की नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से अपील की है कि वे विद्यार्थियों और एक्सचेंज विज़िटर्स के लिए वीज़ा पाबंदियों पर नई चार साल की सीमा लागू न करें। ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज़’ – एफआईआईडीएस में नीति और रणनीति की प्रमुख खांडेराव कांड ने कहा कि यह अमरीका की प्रतिस्पर्धा क्षमता को खुद नुकसान पहुँचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को प्रोग्राम या रिसर्च के बीच में ही बाहर जाना पड़ सकता है, लैब्स को ज़रूरी प्रतिभा खोना पड़ सकता है और अमरीका अपनी नवाचार पाइपलाइन प्रतिस्पर्धियों को सौंप देगा।
यह बयान तब आया है जब अमरीका ने विदेशी विद्यार्थियों, एक्सचेंज विज़िटर्स और पत्रकारों के लिए वीज़ा नियमों को सख्त कर दिया है। इससे वह पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है जिसके तहत वे बिना सरकारी निगरानी के देश में अनिश्चित काल तक रह सकते थे। एफआईआईडीएस ने प्रशासन से अपील की है कि वे इसे लागू करने में देरी करें, विद्यार्थियों की सुरक्षा करें और अमरीका के अनुसंधान और नवाचार को बचाए रखें। एफआईआईडीएस ने कहा कि फॉल 2025 में नए अंतर्राष्ट्रीय छात्र नामांकन में पहले ही 17 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। यह महामारी के बाद से सबसे बड़ी गिरावट है। 96 प्रतिशत संस्थानों ने वीज़ा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया है। कुल अंतर्राष्ट्रीय छात्र नामांकन लगभग 12 लाख है। यह नामांकन अमरीकी अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 55 अरब डॉलर का योगदान देता है।