नई दिल्ली, 06 जुलाई । आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल का भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन पर हमले का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक पोस्ट साझा कर जवाब दिया। उन्होंने नितिन नवीन के कॉलेज सहपाठी, पीयूष पद्माकर द्वारा लिखे गए संस्मरणों को साझा कर कहा कि ये सादगी और सरलता हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए गर्व की बात है।
नितिन नवीन के सहपाठी पीयूष पद्माकर ने 1998 के दिनों को याद करते हुए कहा कि किस प्रकार एक विधायक का बेटा होने के बावजूद नितिन नवीन ने संघर्ष किया। उन्होंने लिखा कि ''ये कहानी साल 1998 से शुरू होती है। मैं और नितिन दोनों दिल्ली में ही पढ़ते थे। दोनों ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। वो सीएसकेएम में पढ़ते थे और मैं केंद्रीय विद्यालय में। नितिन के पिताजी विधायक थे लेकिन मुझे बहुत मानते थे। मेरे पिताजी और नवीन जी के पिता जी बरसों पुराने दोस्त थे। 1998 के मई और जून के महीने में मैं और नितिन साथ एक ही कमरे में रहते थे। 12वीं पास होने के बाद हम दिल्ली के अलग अलग कॉलेज में दाख़िले की दौड़ में शामिल हुए थे। नितिन विधायक का बेटा था लेकिन घमंड एक पैसे का नहीं। लंच में बीस रुपए की थाली हम शेयर करते थे ताकि दस रुपए बच सके। डीटीसी बस में चलते थे, ताकि ऑटो का किराया बच सके। टैक्सी ले लें, इतनी बात नितिन के मुँह से कभी निकली भी नहीं। उस ज़माने में टैक्सी का मतलब पचास रुपये से ऊपर का खर्च था। हमारे छह सात दोस्त अगर आ जाते तो हम दोनों सोचते थे आज थाली कैसे ऑर्डर की जाए ताकि कम खर्च हो। उस वक्त भी नितिन ने कभी किसी को दिखाने या जताने के लिए भी नहीं कहा - वो एमएलए का बेटा है ।''
पीयूष ने कालेज के दिनों में घर लेने की एक घटना को याद करते हुए कहा कि नितिन नवीन सहित चार दोस्त दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाक़े में मल्टी स्टोरी में रहना चाहते थे लेकिन वहां वे मकान ले नही पाए। उन्होंने कहा'' दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर को पता चला किरायेदार के पिता बिहार की राजधानी पटना के विधायक हैं उसने महंगे फ़्लैट दिखाने शुरू कर दिए। बाद में नितिन ने ही कहा, हमारा बजट महीने का दो हज़ार है। पापा इससे ज़्यादा नहीं देंगे। रहना, खाना, कॉलेज जाना, सब दो हज़ार रुपए में करना होगा। इसके बाद अपार्टमेंट में रहना भूलना पड़ा । पश्चिम विनोद नगर के मंडावली इलाक़े में अंदर की गली में आज का बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन अपने तीन दोस्तों के साथ रहने लगा। नौकर या मेड रखने के पैसे थे नहीं। दो दोस्त सुबह सुबह ब्रेकफास्ट बनाते तो बाकी दो दोस्त बर्तन धोते। झाड़ू पोछा लगाते। शुरू शुरू में मैं और नितिन एक साथ ड्यूटी पर लगे। दोनों मिलकर झूठे बर्तन भी धो लेते थे। झाड़ू भी लगा लेते थे। पोछा भी। फिर फटाफट तैयार होकर दो बस बदलकर कॉलेज पहुंच जाते थे। नितिन उस ज़माने में भी चारों दोस्तों में सबसे ज़्यादा अनुशासित और मिलनसार था। झगड़े हमारे होते तो सुलझाता नितिन था ''।