प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 14वें दलाई लामा को उनके 91वें जन्मदिन पर बधाई दी और तिब्बती आध्यात्मिक नेता की शांति, सद्भाव और वैश्विक कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
एक्स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि दलाई लामा का शांति और सद्भाव का संदेश दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करता रहता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “परम पावन दलाई लामा को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। शांति और सद्भाव का उनका संदेश विश्व भर के लोगों के लिए मार्गदर्शक रहा है। उनकी नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति तथा वैश्विक भलाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है। उनके दीर्घ और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।”
दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई, 1935 को तिब्बत के तकस्टर में एक किसान परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम ल्हामो थोंडुप था। दो वर्ष की आयु में ही उन्हें 13वें दलाई लामा के पुनर्जन्म के रूप में पहचाना गया और 1939 में उन्हें ल्हासा ले जाया गया। 22 फरवरी, 1940 को उन्हें औपचारिक रूप से तिब्बत राज्य के प्रमुख के रूप में स्थापित किया गया और बाद में उन्हें तेनज़िन ग्यात्सो नाम दिया गया।
उन्होंने 17 नवंबर, 1950 को नोरबुलिंगका पैलेस में तिब्बत का पूर्ण लौकिक नेतृत्व ग्रहण किया। 1959 में तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह के दमन के बाद, वे 80,000 से अधिक तिब्बतियों के साथ भारत भाग गए, जहाँ वे तब से निर्वासन में रह रहे हैं।
दलाई लामा का जन्मदिन प्रतिवर्ष केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) द्वारा मनाया जाता है और इसमें दुनिया भर के अनुयायी भाग लेते हैं।
उनके कार्यालय के अनुसार, आध्यात्मिक नेता लद्दाख क्षेत्र में अपने निर्धारित ग्रीष्मकालीन प्रवास से पहले बाएं घुटने के प्रतिस्थापन की सर्जरी कराने के लिए जून की शुरुआत में दिल्ली गए थे।
ये उत्सव पिछले वर्ष सीटीए के "करुणा का वर्ष" अभियान के शुभारंभ के बाद आयोजित किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य तिब्बती संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों के तहत पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण पहल और तिब्बती भाषा को बढ़ावा देना था।