मेघालय के लोगों ने ‘रूट ब्रिज’ के प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी बखूबी निभाई : पीएम मोदी

Posted on: 2026-06-29


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें एपिसोड में मेघालय के रूट ब्रिज की चर्चा की। पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण इन रूट ब्रिजों के सामने कई चुनौतियां भी आती हैं। ऐसे समय में मेघालय के लोगों ने इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई है। पहले ये पता लगाना भी आसान नहीं था कि ऐसे ब्रिजों की संख्या कितनी है? स्थानीय लोगों ने खुद इनकी गिनती शुरू की। इसके बाद समुदायों ने इन ब्रिजों की देख-भाल की जिम्मेदारी भी संभाली। आज स्थानीय लोग 120 से अधिक रूट ब्रिजों की देख-रेख कर रहे हैं। कुछ टीमें हर साल इन पुलों की स्थिति की जांच करती हैं। कुछ लोगों ने आस-पास के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नर्सरी भी तैयार की है। इस तरह के इनके संरक्षण के लिए एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तैयार हो गया है।

उन्होंने कहा कि मेघालय की पहचान बादलों से है, खूबसूरत नजारों से है। जो मेघालय जाता है, उसे वहां के लोगों का अपनापन भी लंबे समय तक याद रहता है। लेकिन, मेघालय की एक और विशेषता है, जिसकी मैं आज, ‘मन की बात’ में, आपसे चर्चा करना चाहता हूं। ये है – मेघालय के रूट ब्रिज। रास्ता वाला route नहीं, जड़ों वाला root।

पीएम मोदी ने कहा कि इन रूट ब्रिजों की कहानी बहुत रोचक है। उन्होंने बताया कि ये ब्रिज कुछ दिनों या कुछ वर्षों में नहीं बनते। इन्हें तैयार होने में कई दशक लगते हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा दी जाती है। इन जड़ों को जल-धाराओं के पार ले जाया जाता है। समय के साथ वही जड़ें एक मजबूत ब्रिज का रूप ले लेती हैं। इन ब्रिजों की एक और विशेषता है। ये जीवित ब्रिज हैं। समय बीतने के साथ ये और मजबूत हो जाते हैं। इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता दिखाई देती है। इनके पीछे वर्षों का धैर्य और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान है। ये ब्रिज बताते हैं कि मनुष्य प्रकृति के साथ मिलकर कितनी अद्भुत चीजें बना सकता है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब भारत ने मेघालय के रूट ब्रिजों को UNESCO World Heritage Site Network में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष हैली वार जी को Padma Award से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अपने जीवन के 50 से अधिक वर्ष इन रूट ब्रिजों की देखभाल में लगाए हैं। उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणादायक है|

प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि यदि उन्होंने कभी इन रूट ब्रिजों की यात्रा की हो, तो उनकी तस्वीरें social media पर जरूर साझा कीजिए। आपकी तस्वीरें दूसरे लोगों को भी मेघालय की इस अनोखी धरोहर के बारे में जानने के लिए प्रेरित करेगी।