ज्यादा टमाटर वाली सब्जियां, टमाटर में काफी अधिक मात्रा में एसिड होता है जो लोहे के साथ रिएक्ट करता है. इससे सब्जी का रंग काला या गहरा हो सकता है और स्वाद भी हल्का कसैला हो सकता है. ज्यादा समय तक पकाने से यह असर और भी अधिक बढ़ सकता है. इसलिए टमाटर से बनी सब्जियों को स्टील या नॉन-स्टिक बर्तन में बनाना चाहिए.
पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां लोहे के संपर्क में आकर अपना चमकीला हरा रंग खो देती हैं, यह गहरे या काले रंग में बदल सकती हैं, जिससे ऐसा लगने लगता है कि यह खाने लायक नहीं हैं. साथ-साथ स्वाद में भी थोड़ा बदलाव देखा जा सकता है. हरी सब्जियों को एल्यूमिनियम या स्टील के बर्तनों में पकाना ज्यादा सही माना जाता है.
इमली, अमचूर वाली ग्रेवी की सब्जियां लोहे की कढ़ाही में नहीं बनानी चाहिए, इनमें मौजूद एसिड लोहे के साथ रिएक्शन करके खाने का स्वाद बदल सकते हैं, इससे खाना धातु जैसे टेस्ट देने लगता है, साथ ही यह सेहत के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता. इसलिए स्टील या नॉन-स्टिक पैन का इस्तेमाल करें.
दही से बनी सब्जियां जैसे कढ़ी या दही वाली ग्रेवी लोहे की कड़ाही में बनने से उनका स्वाद बदल सकता है. दही की खटास आयरन के साथ मिलकर हल्का कड़वापन पैदा कर सकती है. इसके अलावा इसका रंग भी गहरा हो सकता है और कढ़ी में थोड़ा कालापन देखा जा सकता है.
नींबू का रस सब्जी में डालने से खट्टापन और स्वाद तो आता ही है लेकिन यह भी लोहे के साथ रिएक्ट करता है, और स्वाद को खराब कर सकता है. इससे खाने में धातु जैसा कसैला स्वाद आ सकता है, इसलिए नींबू हमेशा खाना बनाने के बाद खाना खाते समय ही डालें
तोरी या दम आलू जैसी सब्जियां जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, उन्हें लोहे की कढ़ाही में पकाने से उनका रंग और टेक्सचर बदल सकता है. ये सब्जियां ज्यादा देर तक पकाने पर काली दिखने लगती हैं. इसलिए इन्हें हल्के और नॉन-रिएक्टिव बर्तनों में पकाना बेहतर है.