क्या आपने कभी सोचा है कि केले को बॉटनिकल नजरिए से "बेरी" क्यों कहा जाता है, जबकि स्ट्रॉबेरी को नहीं? सुनने में ये थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे पूरी तरह वैज्ञानिक वजह है. आमतौर पर हम फलों को उनके स्वाद, रंग और आकार के आधार पर पहचानते हैं, लेकिन साइंटिस्ट उन्हें इस बात से क्लासिफाइड करते हैं कि वे फूल से कैसे विकसित होते हैं. यही फर्क कई बार चौंकाने वाले नतीजे सामने लाता है.
क्या होता है बेरी
बॉटनी के अनुसार, बेरी वह फल होता है जो फूल के एक ही ओवरी से विकसित होता है और जिसके अंदर गूदे में कई बीज मौजूद होते हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, एग्रीकल्चर एंड नैचुरल रिसोर्सेज की परिभाषा के मुताबिक बेरी ऐसे फल होते हैं जो एक ही ओवरी से बनते हैं और जिनमें बीज गूदे के भीतर होते हैं. इस आधार पर अंगूर, टमाटर और केला ये सभी बेरी के अंतगर्त ही आते हैं.
केला कैसे इसमें फिट बैठता है
केला इस परिभाषा में पूरी तरह फिट बैठता है. यह एक ही फूल की ओवरी से विकसित होता है और इसमें छिलका, मुलायम गूदा और अंदर की संरचना शामिल होती है, जहां बीज मौजूद होते हैं. हालांकि आजकल बाजार में मिलने वाले केले में बीज दिखाई नहीं देते, क्योंकि ये "पार्थेनोकार्पिक" होते हैं, यानी बिना फर्टिलाइजेशन के विकसित होते हैं. लेकिन इससे उनकी बॉटनिकल पहचान नहीं बदलती. कृषि जागरण के अनुसार, आधुनिक खेती के तरीकों के बावजूद केले की संरचना उसे एक सच्ची बेरी बनाती है. सरल भाषा में समझें तो एक "ट्रू बेरी" की खासियत होती है कि एक फूल, एक ओवरी और अंदर से नरम गूदा.
स्ट्रॉबेरी क्यों नहीं आता अंतर्गत
अब बात करते हैं स्ट्रॉबेरी की. नाम में बेरी होने के बावजूद यह बॉटनिकल रूप से बेरी नहीं है. इसे एग्रीगेट फ्रूट कहा जाता है, यानी यह एक ऐसे फूल से बनती है जिसमें कई ओवरी होती हैं. स्ट्रॉबेरी के ऊपर जो छोटे-छोटे दाने दिखते हैं, वे असल में बीज नहीं बल्कि अलग-अलग छोटे फल होते हैं, जिन्हें एकीन कहा जाता है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की स्टडी भी यही कहती है कि स्ट्रॉबेरी बेरी नहीं, बल्कि एग्रीगेट फ्रूट है, इसके ऊपर दिखने वाला हर सीड एक अलग फल होता है. देखने और स्वाद के आधार पर यह तर्क उल्टा लग सकता है, लेकिन विज्ञान पौधों की प्रजनन प्रक्रिया के आधार पर चीजों को परिभाषित करता है, न कि उनके दिखने या खाने के तरीके से पता चलता है.