देश की राजनीति में 2 नवंबर 2026 को कई बड़े घटनाक्रम चर्चा के केंद्र में हैं। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की महारैली, छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कार्रवाई और उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की तैयारियां राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सुर्खियां बनी हुई हैं। इन तीनों घटनाओं का संबंध अलग-अलग मुद्दों से है, लेकिन इनका असर राष्ट्रीय राजनीति, चुनावी रणनीति और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर देखने को मिल सकता है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ महादेव ऐप मामले में जांच का दायरा आगे बढ़ रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन और जनसंपर्क की तैयारियां तेज कर दी हैं।
दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को INDIA गठबंधन के नेताओं ने 'वोट बचाओ, देश बचाओ' के नारे के साथ महारैली आयोजित की। इस रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई नेताओं ने मंच से अपनी बात रखी। विपक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों को लेकर भाजपा ने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। इस तरह रामलीला मैदान की रैली केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं रही, बल्कि आगामी चुनावों से पहले विपक्षी दलों के बीच समन्वय और राजनीतिक रणनीति दिखाने का मंच भी बनी।
रैली में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर तीखे बयान दिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने इन दावों के समर्थन में चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देने की बात कही। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। वहीं ममता बनर्जी ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विपक्षी दलों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी अपने भाषणों में चुनावी व्यवस्था को लेकर चिंता जाहिर की। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को निराधार बताते हुए चुनाव आयोग की संवैधानिक स्वतंत्रता का समर्थन कर रही है।
छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले के प्रमुख आरोपी और ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। सीबीआई की विशेष टीम उसे मस्कट से लेकर भारत पहुंची। अब 2 नवंबर को उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की तैयारी है। सौरभ चंद्राकर लंबे समय से जांच एजेंसियों की तलाश में था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसके आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने ओमान सरकार के सामने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी दोनों इस मामले की जांच कर रहे हैं। चंद्राकर सीबीआई के दो मामलों में वांछित है, जिनमें आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। इसके अलावा ईडी के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक महादेव ऑनलाइन बुक एक बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के रूप में संचालित हो रहा था। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और दूसरे खेलों पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता था। इसके संचालन के लिए अलग-अलग पैनल और फ्रेंचाइजी बनाई गई थीं, जिनके माध्यम से ग्राहकों को जोड़ा जाता था। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को कई बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था और बाद में हवाला के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। एजेंसियों को सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर संरक्षण राशि दिए जाने के आरोपों की भी जांच करनी है। इस मामले में सीबीआई पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जुलाई 2026 में भी सीबीआई ने अलग-अलग मामलों में छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए थे। अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन, विदेशों में मौजूद संपर्कों और कथित तौर पर जुड़े अन्य लोगों के संबंध में पूछताछ का अवसर मिलेगा। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने मिशन-2027 के तहत बड़े नेताओं की रैलियों से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति बनाई है। इस रणनीति को प्लान 40 नाम दिया जा रहा है। इसके तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों में करीब 18 बड़ी रैलियां कर सकते हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगभग 20 रैलियों की योजना है। इस तरह दोनों शीर्ष नेताओं की करीब 40 बड़ी सभाओं के जरिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी है। पार्टी का मानना है कि बड़े नेताओं के कार्यक्रमों के साथ स्थानीय संगठन की सक्रियता भी चुनावी तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। इसके लिए जिला, विधानसभा, मंडल और बूथ स्तर पर जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं।
भाजपा की रणनीति में करीब 23 हजार फोकस बूथों पर विशेष ध्यान देने की योजना भी शामिल है। इन बूथों पर संगठन की स्थिति, मतदाताओं से संपर्क, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और स्थानीय सामाजिक समीकरणों की जानकारी जुटाई जाएगी। पार्टी ने हर 50 परिवारों तक एक कार्यकर्ता की पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा नवंबर और दिसंबर में कई संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। तीन से पांच नवंबर के बीच प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्राओं की तैयारी है। प्रत्येक पदयात्रा में कम से कम 25 हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी का लक्ष्य बताया गया है। युवा सम्मेलन, किसान संवाद और घर-घर जनसंपर्क जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। इन तैयारियों के जरिए भाजपा चुनाव से पहले अपने संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करना चाहती है। दूसरी तरफ विपक्ष भी चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की राजनीति में मिशन-2027 की तैयारियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं।
इन तीनों घटनाक्रमों को देखें तो देश की राजनीति में आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की संगठनात्मक तैयारियां प्रमुख चर्चा के विषय बने रहेंगे। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने इन आरोपों का जवाब देने के लिए अपने अभियान तेज किए हैं। महादेव ऐप मामले में सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण छत्तीसगढ़ में चल रही जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वहीं उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्लान 40 आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की शुरुआती रणनीति को सामने रखता है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि इन राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रमों में आगे क्या नए मोड़ आते हैं और संबंधित पक्ष अपने-अपने दावों और रणनीतियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।