मार्केट में जब भी हम केला खरीदते हैं, तो उसका कलर सबसे पहले देखते हैं. अक्सर हम काले या फिर ज्यादा पके केले खरीदने से कराते हैं. वहीं, जब ये केले घर में भी काले होने लगते हैं, तो इसे हम कूड़ेदान में डाल देते हैं. लेकिन आप आज से शायद ऐसा बिल्कुल भी न करें.
दरअसल, हाल ही में एक रिसर्च सामने आया है, जिसमें ऐसे केलों को लेकर दिलचस्प बात सामने आई है. रिसर्चर्स का कहना है कि ज्यादा पके हुए केले में कुछ ऐसे नैचुरल कंपाउंड होते पाए गए हैं, जिो लैब में कैंसर सेल्स पर असर दिखाने की क्षमता प्रदर्शित की. हालांकि, वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि ये शुरुआती रिसर्च है और इसे कैंसर का इलाज नहीं माना जा सकता.
जापानी शोधकर्ता M. Shimizu और उनकी टीम की ओर से प्रकाशित अध्ययन 'Banana Extracts and Biological Activity Research' में बताया गया है कि जब केला अधिक पक जाता है और उसका छिलका गहरे भूरे या काले रंग का होने लगता है,
तब उसमें कुछ बायोएक्टिव कंपाउंड की मात्रा बढ़ सकती है. वैज्ञानिकों ने इन कंपाउंड का अध्ययन किया और पाया कि लैब परीक्षणों में ये कैंसर सेल्स की वृद्धि को प्रभावित करने में सक्षम दिखे.
रिसर्च में सबसे दिलचस्प बात ये रही कि जिन कंपाउंड ने कैंसर सेल्स पर प्रभाव दिखाया, उन्होंने हेल्दी सेल्स को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाया. यही वजह है कि वैज्ञानिक इस विषय पर आगे और गहन अध्ययन करने में रुचि दिखा रहे हैं. हालांकि, अभी ये निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सिर्फ अधिक पका केला खाने से कैंसर से बचाव संभव है.
किसी भी तरह के केले का सेवन करने से आपके शरीर को भरपूर रूप से पोटैशियम, फाइबर, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट्स प्राप्त होता है. ये पाचन को दुरुस्त करने से लेकर शरीर को एनर्जी प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.