रायपुर विवेकानंद नगर में आयोजित सर्वमंगलमय वर्षावास 2026 के तहत 49 दिवसीय पंच परमेष्ठि श्रेणी तप के समापन अवसर पर तीन दिवसीय रत्नत्रयी महोत्सव का आयोजन भक्तिभाव के साथ किया जाएगा। 18 से 20 सितंबर तक होने वाले इस महोत्सव में भक्तामर अभिषेक, सामूहिक क्षमायाचना, मेहंदी सांझी, भव्य रथयात्रा, तपस्वियों का सम्मान, तपस्या का शाही पारणा और भगवान महावीर के भवों पर आधारित जीवंत झांकी सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
महोत्सव का आयोजन नमिउण-लब्धिनिधान तीर्थ प्रणेता, छत्तीसगढ़ श्रृंगार प.पू. खरतरगच्छाचार्य जिन पीयूषसागर सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा-5 के सान्निध्य में किया जा रहा है।
भक्तामर अभिषेक से होगी शुरुआत
महोत्सव की शुरुआत 18 सितंबर को सुबह 8 बजे संभवनाथ जिनालय, विवेकानंद नगर में भक्तामर अभिषेक के साथ होगी। इसके बाद सुबह 10:15 बजे ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में सामूहिक क्षमायाचना का आयोजन किया जाएगा।
इसके पश्चात गुरु भगवंतों की पावन निश्रा में स्थानीय समाज की ओर से तपस्वियों के लिए साधार्मिक वात्सल्य का आयोजन रत्न प्रभ सुरी भवन में किया जाएगा।
मेहंदी सांझी में दिखेगा भक्ति और उत्सव का रंग
18 सितंबर को दोपहर 3 बजे ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में संभव महिला मंडल एवं स्नेहल व्यास की ओर से मेहंदी सांझी का आयोजन होगा।
संभवनाथ जिनालय से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं बैंड-बाजे के साथ मेहंदी का थाल लेकर ज्ञानवल्लभ उपाश्रय पहुंचेंगे। यहां मुनिभगवंतों की पावन निश्रा में तपस्वियों को मेहंदी लगाई जाएगी। महिला मंडल की ओर से तपस्या के निमित्त गीत-संगीत का आयोजन भी होगा।
49 दिवसीय कठिन तप का होगा समापन
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि 2 अगस्त से 49 दिवसीय पंच परमेष्ठि श्रेणी तप की शुरुआत हुई थी। इस कठिन तप में 35 उपवास और 15 व्यासना शामिल रहे।
उपवास के दौरान तपस्वियों ने सूर्योदय के बाद धर्मसभा में मुनिभगवंत से मांगलिक के पश्चात केवल गर्म पानी ग्रहण किया। वहीं आवश्यकता के अनुसार सूर्यास्त से दो घंटे पूर्व भी इसका सेवन किया गया।
18 और 19 सितंबर को बेला, 20 को शाही पारणा
तपस्या के अंतिम चरण में 18 और 19 सितंबर को बेला, यानी लगातार दो दिन का उपवास रखा जाएगा। इसके साथ ही सभी तपस्वी अपनी कठिन तपस्या पूर्ण करेंगे।
इसके बाद 20 सितंबर को पंच परमेष्ठि श्रेणी तप का शाही पारणा आयोजित किया जाएगा। महोत्सव के दौरान तपस्वियों के सम्मान के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
रत्नत्रयी महोत्सव के तीनों दिनों में श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, तप, संयम और आध्यात्मिक साधना से जुड़े विविध आयोजन आकर्षण का केंद्र रहेंगे।