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काठमांडू, 09 सितंबर सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर, 2025 को ‘भयानक तबाही का दिन’ बताते हुए कहा है कि जेन-जी प्रदर्शनों के बाद हुई हिंसा राज्य, लोकतंत्र और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर बड़ा हमला थी।
घटनाओं की पहली बरसी के मौके पर बुधवार को जारी वीडियो संदेश में ओली ने कहा कि जेन-जी आंदोलन 8 सितंबर को शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में आपराधिक समूह इसमें घुस गए और उनके अनुसार, जानबूझकर प्रदर्शन को हिंसक बना दिया। ओली ने कहा कि युवा सुशासन और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक समूहों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में घुसकर हिंसा भड़काई। ओली के अनुसार, युवा प्रदर्शनकारियों को जानबूझकर घेरकर संसद भवन की ओर ले जाया गया, जहां स्थिति बिगड़ गई और गोलीबारी में लोगों की मौत हुई। ओली ने आंदोलन के दौरान मारे गए युवाओं और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को याद करते हुए उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने उपचार करा रहे घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की।
हालांकि, ओली ने कहा कि 9 सितंबर की घटनाएं पिछले दिन हुई मौतों से पैदा हुए आक्रोश से कहीं आगे निकल गई थीं। उन्होंने राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सिंहदरबार, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के कार्यालयों तथा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर हुए हमलों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हुई तोड़फोड़, लूटपाट, आगजनी और जनहानि को केवल पिछले दिन हुई मौतों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं माना जा सकता। ओली ने 9 सितंबर की घटनाओं को एक कथित ‘खतरनाक साजिश’ का परिणाम बताया। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य राष्ट्रवाद, लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था के नेपाल के प्रगतिशील रास्ते को पलटना और देश को निरंकुशता तथा अराजकता की ओर धकेलना था।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि तबाही के लिए जिम्मेदार लोगों को अब तक जवाबदेह क्यों नहीं ठहराया गया। ओली ने पूछा, “9 सितंबर की तबाही के आरोपियों को छूट क्यों दी जा रही है? रिपोर्टों को गोपनीय क्यों रखा जा रहा है?” ओली ने कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों की चिंताएं और उनकी मंशा वास्तविक थीं, लेकिन जेन-जी आंदोलन के नाम पर हुई हिंसा का फायदा अन्य ताकतों ने उठाया।
उन्होंने कहा कि युवाओं में असंतोष अभी भी व्यापक है और पिछले साल की घटनाओं को दोबारा नहीं होने देना चाहिए। ओली ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों के खिलाफ नफरत तथा बदले की भावना फैलाने के प्रयासों की भी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां देश को और अधिक पीछे धकेल सकती हैं।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान करते हुए ओली ने देश के देशभक्त, लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और वामपंथी शक्तियों तथा शांति चाहने वाले लोगों से संविधान, राष्ट्रीय हित और नेपाल की संप्रभुता की रक्षा के लिए साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने जनता से 9 सितंबर की बरसी को दण्डहीनता और अराजकता के खिलाफ प्रतिबद्धता जताने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्ध नेपाल के निर्माण की दिशा में काम करने का अवसर बनाने का आह्वान किया।