रायपुर विवेकानंद नगर स्थित ज्ञानवल्लभ उपाश्रय में जारी सर्वमंगलमय वर्षावास में आत्मकल्याण की भावना से तप-साधना की श्रृंखला जारी है। 31 अगस्त से मुनि संवेगरत्न सागर आदि ठाणा की पावन निश्रा में 16 दिवसीय अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप का शुभारंभ हुआ। सुबह 8.30 बजे मंगल कलश की स्थापना की गई। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रावक- श्राविकाओं ने जिनवाणी का लाभ लिया।
धर्मसभा में मुनि संवेगरत्न सागर ने कहा कि 16 दिनों तक चलने वाले इस तप में प्रतिदिन अक्षय निधि घट को भरने के लिए श्रद्धालु आएंगे और उसमें अक्षत व उत्तम द्रव्य अर्पित करेंगे। इसी तरह मनुष्य को अपनी आत्मा रूपी घट को ज्ञान से भरने का पुरुषार्थ करना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि आत्मा को ज्ञान रूपी वर्षा से नहीं भिगोया तो तप और साधना का उद्देश्य अधूरा रह जाता है। ज्ञान के बिना दर्शन की शुद्धि संभव नहीं है। आत्मा को ज्ञान से रंजित किए बिना भव का सुधार नहीं हो सकता।
मुनिश्री ने कहा कि अक्षय निधि तप केवल द्रव्य और अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भावों के साथ जोड़ना जरूरी है। जब तक आत्मा रूपी घट ज्ञान से नहीं भरेगा, तब तक कषायों पर विजय प्राप्त करना कठिन है। तप को भावों से जोड़कर साधना करने पर ही यह आत्मा को अंतिम लक्ष्य मोक्ष की ओर ले जा सकती है। अपने भीतर अखंड ज्ञान का पुंज लाने का प्रयास ही वास्तविक भव सुधार का मार्ग है।
प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी तीन दोषों से बचें
धर्मसभा में मुनि शाश्वतरत्न सागर ने प्रपंची, प्रलापी और प्रकोपी तीन दोषों से बचने की सीख दी। मुनिश्री ने कहा कि माता-पिता को छल-कपट, झूठ और प्रपंच से दूर रहना चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता को देखकर ही संस्कार ग्रहण करते हैं। शुरुआत से जैसी शिक्षा और वातावरण बच्चों को मिलता है, उनका व्यक्तित्व भी उसी अनुरूप विकसित होता है।
मुनिश्री ने कहा कि अनावश्यक बोलने की आदत यानी प्रलाप संबंधों में कटुता पैदा कर सकती है। इसी प्रकार बात-बात पर क्रोध करने से व्यक्ति प्रकोपी बन जाता है। परिवार में ऐसा व्यवहार करने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान का भाव कम हो जाता है। इसलिए जीवन में इन तीनों दोषों का त्याग कर संयम, मधुर वाणी और शांत व्यवहार को अपनाना चाहिए।
तप में 15 दिन एकासना, 16वें दिन उपवास
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जसराज लुनिया एवं महासचिव सुरेश बरड़िया ने बताया कि अक्षय निधि समवशरण विजय कषाय तप के तहत तपस्वी 15 दिनों तक एकासना करेंगे और 16वें दिन उपवास रखेंगे। मंगल कलश स्थापना के साथ तप की विधिवत शुरुआत हुई।
उन्होंने बताया कि अक्षय निधि तप की पूर्णता के बाद 8 दिवसीय मोक्ष तप का शुभारंभ होगा। इसमें तपस्वी 7 दिनों तक लगातार एकासना करेंगे और आठवें दिन उपवास रखेंगे। वर्षावास के दौरान होने वाली इन तप-साधनाओं में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं सहभागी बन रहे हैं।