सोमवार से अमेरिका के ऐशविले में शुरू हो रही G20 वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की बैठक में भारत ऊर्जा सुरक्षा, बढ़ते व्यापार तनाव और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिशों को अपनी प्राथमिक चिंता बनाएगा।
वित्त मंत्री पहुंचीं अमेरिका, बैठक की मेजबानी स्कॉट बेसेंट करेंगे
इसी क्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को साउथ कैरोलिना के ग्रीनविले-स्पार्टनबर्ग इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचीं, जहां भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उनका स्वागत किया। वित्त मंत्रालय ने X पर जानकारी दी कि वे अगले दो दिनों में ऐशविले, नॉर्थ कैरोलिना में G20 और संबंधित बैठकों में भाग लेंगी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट सोमवार और मंगलवार को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों व सेंट्रल बैंक गवर्नर्स की मेजबानी करेंगे। बैठक का फोकस वैश्विक विकास को फिर गति देना, आर्थिक असंतुलन कम करना, सॉवरेन डेट से निपटना और सप्लाई चेन मजबूत करना रहेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान: भारत के आर्थिक हित दांव पर
भारत के लिए ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल ट्रैफिक की रुकावट के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, फ्रेट और इंश्योरेंस की बढ़ती लागत से आयात बिल बढ़ सकता है, महंगाई दबाव बढ़ा सकती है और रुपये पर असर पड़ सकता है। भारत अमेरिका की उस कोशिश पर भी नजर रखेगा, जिसमें वह G20 सदस्यों को ईरान के खिलाफ सख्त आर्थिक कदम उठाने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन उन कमर्शियल संबंधों को सीमित करने का दबाव बढ़ा सकता है, जिनसे तेहरान को आर्थिक सहारा मिलता है। भारत के ईरान के साथ लंबे आर्थिक और रणनीतिक रिश्ते हैं, जिनमें चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट शामिल है। नई दिल्ली को इन हितों और अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी के बीच संतुलन साधना होगा।
व्यापार असंतुलन और चीन का छाया प्रभाव
व्यापार असंतुलन बैठक का एक और प्रमुख मुद्दा होगा। अमेरिका चाहता है कि G20 उन औद्योगिक नीतियों की जांच करे जो अत्यधिक उत्पादन और भारी सब्सिडी वाले सामान को वैश्विक बाजार में लाती हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयानों से बीजिंग के निर्यात-केंद्रित मॉडल को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताएं साफ झलकती हैं। भारत की भी स्टील, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा विनिर्माण पर सस्ते चीनी आयात के असर को लेकर अपनी चिंताएं हैं। वहीं नई दिल्ली एकतरफा टैरिफ और संरक्षणवादी कदमों के खिलाफ आगाह कर सकती है, जिनका उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पेश करेंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
G20 बैठक से पहले शिकागो में बिजनेस राउंडटेबल के दौरान सीतारमण ने वैश्विक कंपनियों से भारत में मैन्युफैक्चरिंग बेस और टेक्नोलॉजी-इनोवेशन सेंटर स्थापित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नीतिगत माहौल तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है कि व्यवसाय निवेश करें, विनिर्माण करें, नवाचार करें और विस्तार करें। वित्त मंत्री ने निवेशकों से आग्रह किया कि वे भारत को सिर्फ बड़ा उपभोक्ता बाजार न मानें, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और निर्यात का प्लेटफॉर्म समझें। उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, वित्तीय सेवाएं, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग, डिफेंस और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर जोर दिया।
सॉवरेन डेट और बहुपक्षीय बैंक सुधार भी एजेंडे मेंसॉवरेन डेट का मुद्दा भी चर्चा में रहेगा। भारत पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे देशों के लिए तेज और पारदर्शी पुनर्गठन तथा बहुपक्षीय संस्थाओं व बड़े लेनदारों के बीच बेहतर सहयोग की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली बहुपक्षीय विकास बैंकों में सुधार और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में इंफ्रा व विकास कार्यक्रमों के लिए उनकी वित्तपोषण क्षमता बढ़ाने का समर्थन जारी रखेगी। स्कॉट बेसेंट ने ऐशविले पहुंचकर X पर कहा कि इस साल G20 फाइनेंस ट्रैक की मेजबानी करते हुए अमेरिका विकास को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने नीति निर्माताओं और निजी क्षेत्र के नेताओं को एक साथ लाकर जोर देने की बात कही कि मजबूत विकास न सिर्फ संभव है, बल्कि जरूरी भी है। ऐशविले बैठक दिसंबर में मियामी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में होने वाले G20 लीडर्स समिट से पहले फाइनेंस ट्रैक का महत्वपूर्ण हिस्सा है।