नेपाल आपदा में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों से जुड़ी खबर

Posted on: 2026-08-29


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रायपुर: नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद दो नई झीलें बनने से खतरा अभी टला नहीं है। इनमें से एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी का आकार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अधिकारियों को फिर से बाढ़ या भूस्खलन का खतरा सता रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के बाद ये दोनों जलाशय बने हैं। इसी इलाके में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। तेज बहाव अपने साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें बहाकर नीचे के इलाकों में ले गया था।

नेपाल और तिब्बत में मौत का आंकड़ा बढ़कर 633 हो गया है। वहीं लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 हो गई है, जिनमें 320 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय तिब्बत में फंसे हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ में छत्तीसगढ़ के 2 लोग लापता हैं। इनमें अंबिकापुर की डॉ. मीना गुप्ता और बिलासपुर की डॉ. प्रियंका चौधरी शामिल हैं, वहीं बिलासपुर की ब्यूटीशियन मंजू राय चौधरी( 65) के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है। उनसे संपर्क की कोशिश जारी है। राज्य सरकार तीनों की जानकारी जुटा रही है।

अंबिकापुर के वरिष्ठ भाजपा नेता करता राम गुप्ता की बेटी डॉ. मीना गुप्ता कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। बाढ़ के समय वे इमिग्रेशन सेंटर में थीं। उनके साथ यात्रा कर रहे करीब 80 लोगों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। बिलासपुर की डॉ. प्रियंका चौधरी से 25 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनकी मां की फोन पर बात हुई थी। प्रियंका ने बताया था कि वे चीन एंबेसी के पास इमिग्रेशन की प्रक्रिया के लिए जा रही हैं। इसके कुछ देर बाद बाढ़ की खबर आई और उनसे संपर्क टूट गया।

रायपुर की मोनिका यादव के लापता होने की सूचना के बाद प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क कर लिया है। संबंधित एजेंसियों से उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है। प्रशासन के मुताबिक रायपुर के 5 नागरिक सुरक्षित हैं और नेपाल से लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं। रायपुर के महादेव घाट निवासी मोनिका यादव 22 अगस्त को नेपाल गई थीं। बाढ़ के बाद उनसे संपर्क टूट गया था। अब प्रशासन ने उनके परिजनों से संपर्क कर लिया है और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।

इसी तरह बिलासपुर की 65 वर्षीय मंजू राय चौधरी भी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गई थीं। उनके परिजनों से भी प्रशासन का संपर्क हो गया है। संबंधित एजेंसियों से जानकारी लेकर स्थिति की पुष्टि की जा रही है। मंजू बिलासपुर से अकेले कलकत्ता गई थीं, जहां से 21 अगस्त को 30 लोगों के दल के साथ नेपाल रवाना हुईं। 25 अगस्त को परिजनों से आखिरी बार बात हुई थी। तीन सितंबर को उनकी वापसी होनी थी। आपदा के बाद संपर्क टूटने पर परिवार ने प्रशासन से मदद मांगी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि मंजू के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है, उनसे संपर्क की कोशिश की जा रही है। बिलासपुर की डॉ. प्रियंका चौधरी के पिता रमेश चौधरी ने बताया कि 25 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनकी बेटी की रोज की तरह मां से फोन पर बात हुई थी। प्रियंका ने बताया था कि वह चीन एंबेसी के पास इमिग्रेशन की प्रक्रिया के लिए जा रही हैं। इसके कुछ देर बाद नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ की खबर आई और प्रियंका से संपर्क टूट गया। हादसे की खबर के बाद परिवार ने फिनलैंड में रह रहे प्रियंका के पति से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे भी बात नहीं हो सकी। मानसरोवर यात्रा पूरी करने के बाद प्रियंका को काठमांडू से दिल्ली और फिर रक्षाबंधन पर बिलासपुर आना था। प्रियंका ने स्कूल की पढ़ाई बिलासपुर से की है। इसके बाद राजनांदगांव से बीडीएस, यूके से एमडीएस और फिनलैंड से पीएचडी की। वह करीब 10 साल से फिनलैंड में रह रही हैं। रायपुर के माना क्षेत्र के दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन, यतेंद्र प्रकाशी और दिनेश सिंह ठाकुर के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है। पांचों 21 अगस्त को नेपाल गए थे। अब वे नेपाल से रायपुर लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं। 25 अगस्त को डॉ. मीना गुप्ता समेत 80 यात्रियों का दल इमीग्रेशन सेंटर पहुंचा था, तभी सेंटर बाढ़ की चपेट में आ गया। मीना ने पिता करता राम गुप्ता को भी यात्रा पर चलने कहा था, लेकिन व्यस्तता के कारण वे नहीं गए। हादसे के बाद से मीना से संपर्क नहीं हो सका है, परिवार को उनकी सकुशल वापसी की उम्मीद है। मीना की शुरुआती पढ़ाई अंबिकापुर के होलीक्रॉस स्कूल में हुई। वे इंग्लैंड में स्किन स्पेशलिस्ट हैं। पर्यटन और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल केंद्र सरकार के संपर्क में हैं। उन्होंने करता राम गुप्ता से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।