इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एक बार फिर प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने का दावा किया जा रहा है। इस बार बीएससी प्रथम वर्ष के ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ विषय की परीक्षा का पेपर परीक्षा शुरू होने से करीब छह घंटे पहले लीक होने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परीक्षा संचालन प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, बीएससी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ विषय की परीक्षा 19 अगस्त को सुबह 10 बजे निर्धारित थी। दावा किया जा रहा है कि परीक्षा शुरू होने से करीब छह घंटे पहले, सुबह लगभग 4 बजे ही प्रश्नपत्र लीक हो गया था। सबसे गंभीर आरोप यह है कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न कथित तौर पर पहले से प्रसारित प्रश्नपत्र से पूरी तरह समान थे।
यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो यह विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर मामला होगा। प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाहर पहुंचने से न केवल परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होती है, बल्कि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी मेहनत पर भी सवाल खड़े होते हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग उठना स्वाभाविक है। बताया जा रहा है कि परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों के बीच भी इस कथित पेपर लीक को लेकर चर्चा है। हालांकि, फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रश्नपत्र लीक होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा से पहले लीक हुआ था या नहीं। मामले की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कथित प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले किसके पास पहुंचा, उसे किस माध्यम से प्रसारित किया गया और परीक्षा केंद्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचने से पहले उसकी गोपनीयता में किस स्तर पर चूक हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न और कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र के बीच समानता कितनी है। इस बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पेपर लीक मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि मामले की जांच जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मामले की जांच को लेकर उम्मीद बढ़ी है कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी
सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बीएससी प्रथम वर्ष के इस कथित पेपर लीक मामले ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर अब विश्वविद्यालय प्रशासन तथा जांच एजेंसियों की आगामी कार्रवाई पर है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की विस्तृत प्रतिक्रिया और जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ‘फंडामेंटल ऑफ जेनेटिक्स’ का प्रश्नपत्र वास्तव में परीक्षा से पहले लीक हुआ था या नहीं, और यदि लीक हुआ तो इसके पीछे कौन जिम्मेदार था।