जांजगीर-चांपा, 24 अगस्त मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा प्रदेश में मेरी बेटी-मेरा अभिमान की शुरुआत के साथ ही बेटियों के सम्मान, सुरक्षा एवं सुविधा के लिए विभिन्न कार्यों को गति दी जा रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के शासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं के लिए 79 बालिका शौचालय निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री विनय कुमार पोयाम के मार्गदर्शन में स्वीकृत इन कार्यों की लागत 4.30 लाख रुपये प्रति शौचालय निर्धारित की गई है। इन शौचालयों के निर्माण से विद्यालयों में बालिकाओं को आवश्यक मूलभूत सुविधा उपलब्ध होगी तथा उनके लिए स्वच्छ एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा।
विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना के तहत स्वीकृत इन कार्यों को विद्यालयों की आवश्यकता और बालिकाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि जिन विद्यालयों में बालिकाओं के लिए पर्याप्त शौचालय सुविधा उपलब्ध नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर इस सुविधा से जोड़ा जाए।
जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में आवश्यक अधोसंरचना एवं मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बालिका शौचालय निर्माण के साथ-साथ योजना के तहत ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनका सीधा लाभ विद्यार्थियों एवं ग्रामीण समुदाय को मिले। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध रूप से प्रारंभ कराया जाए। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, उपयोगिता एवं निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की नियमित समीक्षा करते हुए आवश्यकता के अनुसार नए कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। विद्यालयों में स्वच्छ एवं सुरक्षित शौचालय की सुविधा बालिकाओं की शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
सुविधाओं के अभाव में छात्राओं को होने वाली परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 79 बालिका शौचालयों की स्वीकृति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जिले के अधिक से अधिक शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों, विशेषकर बालिकाओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि वे बिना किसी असुविधा के नियमित रूप से विद्यालय आकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। आवश्यकता आधारित कार्यों की स्वीकृति की प्रक्रिया आगामी दिनों में भी निरंतर जारी रहेगी।