रायपुर: कभी अनिश्चित आमदनी, कभी पारंपरिक हुनर पर निर्भरता और भविष्य की चिंता! तिल्दा विकासखंड के ग्राम पंचायत सिनोधा की सपेरा बस्ती के 34 परिवारों के लिए अब तस्वीर बदलने लगी है। जॉब कार्ड हाथ में आते ही इन परिवारों के सामने रोजगार का एक व्यवस्थित और भरोसेमंद रास्ता खुल गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है। गौरतलब है कि कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने गत दिनों बैठक में सँवरा जनजाति के परिवारों को शासन की योजनाओं से लाभान्वित करने के निर्देश दिए थे। इसी कड़ी में संबंधित अधिकारियों ने विकसित भारत-जी राम जी के तहत सपेरा बस्ती में रहने वाले 34 परिवारों का पंजीयन कर उन्हें जॉब कार्ड जारी किए।
अब ये परिवार अपनी आवश्यकता के अनुसार रोजगार की मांग कर सकेंगे और योजनांतर्गत काम प्राप्त कर सकेंगे। मांग के आधार पर प्रत्येक परिवार को 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा तथा 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित है सिनोधा की सपेरा बस्ती में रहने वाले संवरा समुदाय के परिवार परंपरागत रूप से सांपों को पकड़ने और उनसे जुड़े पारंपरिक हुनर के लिए जाने जाते हैं। बदलते समय के साथ पारंपरिक आजीविका के अवसर सीमित होने से कई परिवारों की आय अनिश्चित रही है। ऐसे में जॉब कार्ड उनके लिए सम्मानजनक रोजगार और नियमित आय की दिशा में एक नया विकल्प लेकर आया है।
बस्ती के निवासी चरनू मरकाम ने जॉब कार्ड मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि पहले आमदनी कभी होती थी और कभी नहीं। अब जॉब कार्ड बनने से काम की मांग करने और रोजगार पाने की राह आसान होगी। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी और भविष्य को लेकर भी निश्चिंतता होगी। जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के मार्गदर्शन में प्रशासन ने इन परिवारों को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित न रखते हुए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। एपीओ रोशनी तिवारी ने बताया कि बस्ती के 12 परिवारों ने सुअर पालन के लिए सहमति दी है। स्थल निरीक्षण एवं उपलब्धता के आधार पर सुअर शेड स्वीकृति की प्रक्रिया की जा रही है। इससे परिवारों को रोजगार के साथ अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री साय की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े पात्र परिवारों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।