केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडु ने बुधवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 स्थित दिल्ली अंतरराष्ट्रीय विमानपत्तन लिमिटेड (DIAL) के ट्रांसशिपमेंट एक्सीलेंस सेंटर (TEC) से भारत में ट्रांसशिपमेंट कार्गो सुधार के विस्तारित चरण का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य कार्गो की अनिवार्य दोबारा स्क्रीनिंग की जरूरत को कम कर ट्रांजिट समय, हैंडलिंग लागत और कार्गो टर्मिनलों पर दबाव घटाना है।
60 घंटे से घटकर 20 घंटे हुआ ट्रांजिट समय
राम मोहन नायडु ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उद्योग से मिले फीडबैक के आधार पर ट्रांसशिपमेंट कार्गो की अनिवार्य दोबारा स्क्रीनिंग को एक बड़ी बाधा के रूप में पहचाना गया था। उन्होंने कहा कि चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर किए गए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC) से साबित हुआ कि औसत एंड-टू-एंड ट्रांजिट समय 60 घंटे से घटाकर करीब 20 घंटे किया जा सकता है।
चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर शुरू हुआ था PoC
डोमेस्टिक-टू-इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट के लिए प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट 20 जून 2026 को चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट सेक्टर पर DIAL के TEC के माध्यम से शुरू किया गया था। एयर इंडिया ने इस सेवा का एंड-टू-एंड संचालन किया। शुरुआत के बाद से PoC के तहत 280 मीट्रिक टन कार्गो लदान किया गया और विमान की क्षमता का उपयोग 75% से बढ़कर करीब 100% हो गया।
चार घरेलू और दो अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक विस्तार
PoC की सफलता के बाद नेटवर्क का विस्तार चार अतिरिक्त घरेलू प्रस्थान स्टेशनों—बेंगलुरु, अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद—तथा दो नए अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों—लंदन और कोपनहेगन—तक किया गया है। विस्तारित नेटवर्क के चलते इन मार्गों पर एयर इंडिया की मासिक कार्गो वहन क्षमता 1,763 मीट्रिक टन से बढ़कर 3,183 मीट्रिक टन होने का अनुमान है। यह करीब 80% की वृद्धि है।
भारत को वैश्विक कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब बनाने का लक्ष्य
राम मोहन नायडु ने कहा कि सफल मॉडल को अब चार प्रमुख घरेलू कार्गो बाजारों और दो नए अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों से जोड़ा गया है। तत्काल प्राथमिकता डोमेस्टिक-टू-इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट है, जबकि सरकार की व्यापक महत्वाकांक्षा भारत को पूर्व और पश्चिम के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए वैश्विक कार्गो ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित करना है। आगे चलकर इस फ्रेमवर्क का विस्तार इंटरनेशनल-टू-इंटरनेशनल और इंटरनेशनल-टू-डोमेस्टिक ट्रांसशिपमेंट तक किया जाएगा।
एयर कार्गो हब क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर
मंत्री ने कहा कि यह सुधार प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों को वैश्विक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की व्यापक सरकारी दृष्टि का हिस्सा है। यात्रियों के लिए हब-एंड-स्पोक संचालन को मजबूत करने के बाद अब एयर कार्गो हब की क्षमताओं को विकसित करने के लिए भी इसी तरह के कदम उठाए जा रहे हैं।
2025 में अधिसूचित हुआ था संशोधित सुरक्षा फ्रेमवर्क
संशोधित फ्रेमवर्क को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने AVSEC सर्कुलर संख्या 6/2024 के Addendum-II के रूप में 21 जुलाई 2025 को अधिसूचित किया था। इसके तहत निर्धारित सुरक्षा उपायों के अधीन समर्पित ट्रांसफर कार्गो सिक्योरिटी होल्ड एरिया (TCSHA) के माध्यम से सुरक्षित ट्रांसशिपमेंट कार्गो को दोबारा स्क्रीनिंग के बिना स्थानांतरित करने की अनुमति दी गई थी।
हितधारकों के सहयोग की सराहना
राम मोहन नायडु ने सफल रोलआउट में योगदान देने वाले DIAL, BCAS, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), एयरलाइंस, कस्टम्स और अन्य हितधारकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयासों से एक महत्वपूर्ण बाधा को दूर करने में मदद मिली है, जिससे भारत के एयर कार्गो पारिस्थितिकी तंत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बेहतर होगी।
आगे और स्टेशन और गंतव्य जोड़ने की योजना
आने वाले महीनों में इस फ्रेमवर्क में अतिरिक्त प्रस्थान स्टेशन और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों को शामिल करने की योजना है। इससे भारत की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उड्डयन व्यवस्था और कार्गो हब के रूप में स्थिति को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव समीर कुमार सिन्हा, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के अध्यक्ष विपिन कुमार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव आसंगबा चुबा ओ, BCAS की संयुक्त महानिदेशक प्रतिभा अम्बेडकर सहित MoCA, AAI, BCAS, DIAL, एयर इंडिया और अन्य हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।