उत्तराखंड में भारी बारिश, ऋषिकेश में गंगा खतरे के निशान से ऊपर

Posted on: 2026-08-18


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देहरादून, 18 अगस्त । उत्तराखंड में मानसून सक्रिय है। पिछले 24 घंटे में राज्य के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हुई है। नरेंद्रनगर में सर्वाधिक 265 मिलीमीटर (मिमी) वर्षा हुई है। राज्य में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और ऋषिकेश में गंगा खतरे के निशान से ऊपर है। मौसम एवं विज्ञान विभाग ने देहरादून, टिहरी, पौड़ी और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

राजधानी देहरादून समेत प्रदेशभर में सोमवार से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला जारी है। कई क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश हो रही है, जबकि आसमान में काले घने बादल छाए रहे और मौसम ठंडा है। लगातार बारिश के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़क अवरोध और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

मौसम एवं विज्ञान विभाग ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है। देहरादून, टिहरी, पौड़ी और ऊधमसिंह नगर में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर आने की संभावना है। अन्य जिलों में भी कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है।

केंद्रीय जल आयोग के हिमालयी गंगा मंडल की दैनिक जलस्तर एवं बाढ़ पूर्वानुमान रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार सुबह आठ बजे ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 339.65 मीटर दर्ज किया गया, जो 339.50 मीटर के चेतावनी निशान से 0.15 मीटर ऊपर है।

हरिद्वार में गंगा का जलस्तर 292.74 मीटर रहा, जो चेतावनी निशान 293 मीटर से 0.26 मीटर नीचे है। यहां भी जलस्तर बढ़ रहा है। भीमगोड़ा बैराज से गंगा में 1,10,994 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार काली नदी के धारचूला में जलस्तर 888.90 मीटर रहा, जबकि चेतावनी निशान 889 मीटर है। यहां भी जलस्तर बढ़ रहा है। जौलजीवी में गौरी नदी का जलस्तर 605.30 मीटर और पिथौरागढ़ में सरयू का जलस्तर 450 मीटर दर्ज किया गया।

अलकनंदा नदी के रुद्रप्रयाग संगम स्थल पर जलस्तर 621.78 मीटर और खतरे के निशान 624.70 मीटर से नीचे रहा। श्रीनगर में अलकनंदा का जलस्तर 533.80 मीटर दर्ज हुआ। पिंडर नदी के नन्दकेसरी में 1264.37 मीटर तथा कर्णप्रयाग में 769.54 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया।

भागीरथी नदी में उत्तरकाशी में जलस्तर 1120.50 मीटर, कोटेश्वर में 541.50 मीटर और देवप्रयाग में 461.50 मीटर दर्ज हुआ। मंदाकिनी नदी के रुद्रप्रयाग में जलस्तर 624.90 मीटर रहा, जो चेतावनी निशान 625 मीटर के करीब है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 24 घंटे में ऋषिकेश में 223.1 मिमी, हरिद्वार में 71.8 मिमी, नन्दकेसरी में 60.6 मिमी, मरोरा में 50.8 मिमी और काली नदी के धारचूला क्षेत्र में 41.20 मिमी बारिश दर्ज की गई।

केंद्रीय जल आयोग ने बाढ़ पूर्वानुमान के लिए श्रीनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार और रामनगर को प्रमुख स्थल के रूप में चिन्हित किया है। वीरभद्र बैराज, ऋषिकेश से 1,05,591 क्यूसेक और कोसी बैराज, रामनगर से 7,559 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया।

विभाग के अनुसार 204.4 मिमी से अधिक बारिश अत्यंत भारी, 115.5 से 204.4 मिमी बहुत भारी और 64.4 से 115.5 मिमी भारी बारिश की श्रेणी में आती है। मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की अपील की है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को भी संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

मौसम एवं विज्ञान विभाग के अनुसार 17 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 18 अगस्त सुबह 8:30 बजे तक मैनुअल वर्षामापी के आंकड़ों में काशीपुर में 170 मिमी, जसूर में 100, कोटद्वार में 89, यमकेश्वर में 75, जौलीग्रांट में 72.4 और देहरादून में 70.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। मसूरी में 65.5, कीर्तिनगर में 65, पुरोला में 60, सामा में 56 और पौड़ी में 54 मिमी वर्षा हुई।

स्वचालित मौसम केंद्रों के अनुसार यमकेश्वर में 174 मिमी, कोटद्वार में 141, रामनगर में 131, सहस्रधारा आईटीआई में 120.5, हाथीबड़कला में 119.5 और मालदेवता में 114 मिमी बारिश हुई। काशीपुर में 111.5, कालाढूंगी में 83.5, स्यूंसी में 78 और गुलरभोज में 71.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

देहरादून जिले में भारी बारिश के कारण स्वारना नदी में फंसे यूपीईएस विश्वविद्यालय के छह छात्रों को राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) ने करीब छह किलोमीटर पैदल ट्रैकिंग कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

अधिकारियों के अनुसार, विश्वविद्यालय के छह छात्र थान गांव, मिसरास पट्टी क्षेत्र में स्वारना नदी के आसपास ट्रैकिंग के लिए गए थे। इसी दौरान भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया और छात्र वहां फंस गए।

सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। दुर्गम एवं चुनौतीपूर्ण रास्ते के बीच जवानों ने करीब छह किलोमीटर पैदल ट्रैकिंग की और छात्रों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। सभी छह छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

अधिकारियों ने लोगों से बारिश के दौरान नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।