कच्चे तेल की तेजी और पश्चिम एशिया तनाव से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 284 अंक टूटा

Posted on: 2026-08-17


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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शुरुआती कारोबार में घरेलू बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। सूचना प्रौद्योगिकी और कुछ प्रमुख बैंकिंग तथा उपभोक्ता शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।भौगोलिक संदर्भ शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 284.85 अंक गिरकर 77,717.05 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी 69.25 अंक की गिरावट के साथ 24,297.05 पर कारोबार करता दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना रहा।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), HCL टेक, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बनाया। दूसरी ओर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाइटन के शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करने वाले चुनिंदा शेयरों में शामिल रहे। बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव के बावजूद इन कंपनियों के शेयर सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए।

सोमवार के कारोबार में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर रही। पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बढ़ जाती है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकती है। महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ाने के साथ महंगाई की स्थिति को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि घरेलू शेयर बाजार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव पर करीब से नजर रखता है।

तेल की कीमतें बढ़ने पर परिवहन, विमानन, पेंट, केमिकल और ऐसे कई उद्योगों की लागत प्रभावित हो सकती है जिनमें कच्चे तेल या उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल होता है। कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका का असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ता है। पश्चिम एशिया में तनाव का प्रभाव केवल तेल तक सीमित नहीं है। वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर शेयर जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों को लेकर सतर्क हो जाते हैं। इससे उभरते बाजारों में विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित होने की आशंका भी रहती है।

सोमवार को आईटी शेयरों में दिखाई दी कमजोरी बाजार के लिए एक और दबाव का कारण बनी। सेंसेक्स में इंफोसिस, TCS, HCL टेक और टेक महिंद्रा जैसे बड़े आईटी शेयर गिरावट में रहे। इन कंपनियों का प्रमुख सूचकांकों में महत्वपूर्ण भार होने के कारण इनके शेयरों में कमजोरी का असर सेंसेक्स और निफ्टी पर भी दिखाई दिया। बैंकिंग क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयर में गिरावट ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी नुकसान में रहे। हालांकि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और टाइटन में खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की। बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर कर सकती है। निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर बनी हुई है। अगर भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। कच्चे तेल के साथ रुपये की चाल भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। तेल की कीमतों में तेजी भारत के आयात बिल को प्रभावित कर सकती है और इसका असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में शेयर बाजार के निवेशक वैश्विक ऊर्जा बाजार से आने वाले संकेतों पर नजर रख रहे हैं। भारतीय बाजार के लिए घरेलू आर्थिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें भी महत्वपूर्ण रहेंगी। हालांकि फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां बाजार की धारणा पर ज्यादा प्रभाव डालती दिखाई दे रही हैं। पश्चिम एशिया से आने वाली किसी भी बड़ी खबर का असर कच्चे तेल और उसके बाद वैश्विक शेयर बाजारों पर तेजी से दिखाई दे सकता है।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स का 284.85 अंक गिरकर 77,717.05 पर आना और निफ्टी का 69.25 अंक टूटकर 24,297.05 पर पहुंचना निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है। बाजार में बिकवाली व्यापक घबराहट के बजाय प्रमुख शेयरों में दबाव के रूप में दिखाई दी। विशेष रूप से आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों में कमजोरी ने बाजार को नीचे खींचा। दूसरी ओर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रहने से सूचकांकों की गिरावट सीमित रही। कारोबारी सत्र आगे बढ़ने के साथ बाजार की दिशा में बदलाव संभव है और निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर बनी रहेगी। फिलहाल कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव घरेलू बाजार के लिए प्रमुख चिंता बने हुए हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और तेल की कीमतों में स्थिरता आती है तो बाजार की धारणा में सुधार हो सकता है। इसके विपरीत तनाव बढ़ने की स्थिति में शेयर बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।