नई दिल्ली । आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेन-जी और जेन-अल्फा छात्रों के साथ बातचीत को एनडीए नेताओं ने शुक्रवार को अहम और समय के हिसाब से प्रासंगिक बताया है। नेताओं ने कहा कि मोहन भागवत ने युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुना और लोकतंत्र में संवाद की जरूरत पर जोर दिया। बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने मोहन भागवत के युवाओं से संवाद की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आरएस प्रमुख ने युवाओं के विचारों, चिंताओं और आकांक्षाओं को समझने का बड़ा प्रयास किया। उन्होंने कहा, मोहन भागवत ने बड़े पैमाने पर युवाओं से बातचीत की और उनके विचारों व चिंताओं को समझने का प्रयास किया। मुझे लगता है कि उनकी टिप्पणियां बिल्कुल सही थीं और हम सभी के लिए एक अच्छा उदाहरण हैं।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने भी छात्रों और युवाओं से भागवत के संवाद को समाज के लिए फायदेमंद बताया।
उन्होंने कहा, मोहन भागवत का युवाओं और छात्रों के साथ संवाद बहुत फलदायी रहा। उनका पूरे देश के लिए संदेश बहुत दिलचस्प और उपयोगी था। मुझे यकीन है कि मौजूदा समय में मोहन भागवत का संदेश बहुत महत्वपूर्ण है।
एन रामचंदर राव के मुताबिक, बातचीत के दौरान भागवत ने छात्र आंदोलनों समेत कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख ने माना कि प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आगाह किया कि इसका गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
मुंबई में गुरुवार को मोहन भागवत ने कहा कि जेन-जी आंदोलनों से जुड़े युवाओं को समाज का हिस्सा माना जाना चाहिए और उन्हें 'देश विरोधी' करार नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी चिंताएं जायज हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और चर्चा के लिए जगह होनी चाहिए।
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज का युवा अंधे होकर मानने के बजाय तर्कसंगत जवाब और सार्थक संवाद चाहता है। उनके अनुसार, प्रदर्शन लोकतंत्र में चिंताओं को जताने का अहम तरीका हो सकता है, बशर्ते वह रचनात्मक संवाद पर केंद्रित रहे। हालांकि विपक्षी नेताओं ने मोहन भागवत के बयान की आलोचना की और सवाल उठाया कि क्या सरकारें भी इन सिद्धांतों पर चल रही हैं।