रायपुर । अंतर्राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में धमतरी जिले के कुरुद तहसील अंतर्गत स्थित जुड़वां ग्रामीण क्षेत्र नारी कोकड़ी से लगभग 70 महिलाएँ पहुँचीं। यह ग्रामीण क्षेत्र अत्यंत कमजोर वर्ग का है, जहाँ के निवासी मुख्य रूप से भूमिहीन हैं, दूसरों के खेतों में कार्य करते हैं और जहाँ शिक्षा, रोजगार व स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव रहा है।
लगभग 5 वर्ष पूर्व राष्ट्रसंत आचार्य विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद, मुनि आगम सागर महाराज ससंघ के सानिध्य और सकल जैन समाज रायपुर के धर्मनिष्ठ अध्यक्ष विनोद बड़जात्या के विशेष प्रयासों से यहाँ "हाथ करघा चल चरखा हस्त शिल्प महिला रोजगार एवं प्रशिक्षण केंद्र" की शुरुआत की गई थी।
केंद्र में मास्टर ट्रेनर ब्रह्मचारिणी प्रियंका दीदी, मिनी दीदी और रुचि दीदी द्वारा महिलाओं को हथकरघा एवं चल चरखा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ कार्य प्रारंभ करने से पूर्व शाकाहार अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
वर्षायोग समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरु कृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि वर्तमान में नारी कोकड़ी एवं आसपास के गाँवों की लगभग 60-70 महिलाएँ (जिनकी आयु 18 वर्ष से 68 वर्ष के बीच है) इस केंद्र में कार्यरत हैं। यहाँ मात्र 1 माह का प्रशिक्षण पूरा होते ही महिलाओं का रोजगार
इस केंद्र में चंदेरी बूटी की साड़ियाँ, डूबी, हस्तशिल्प, मधुबनी और हैंडमेड पेंटिंग वाली साड़ियाँ व अन्य वस्त्र तैयार किए जाते हैं। यहाँ निर्मित वस्त्र सीधे जबलपुर मुख्यालय भेजे जाते हैं, जहाँ से पूरे भारतवर्ष में इनकी बिक्री की जाती है। इन वस्त्रों का निर्माण कर रही ग्रामीण महिलाएँ आज प्रतिमाह 10 हजार से 20 हजार रुपए तक की कमाई कर रही हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन रही हैं।
विदित हो कि राष्ट्रसंत आचार्य विद्यासागर महाराज का देश में स्वदेशी, स्वावलंबन और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए "श्रमदान हथकरघा" (चल चरखा) आंदोलन की शुरुआत में अतुलनीय योगदान रहा है। उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत की असली समृद्धि हथकरघा और स्वदेशी वस्त्रों को अपनाने में ही निहित है। वर्ष 2015 में उनके आशीर्वाद से शुरू हुई यह हथकरघा क्रांति आज भी हजारों जरूरतमंदों के जीवन में उजाला फैला रही है।
आचार्यश्री के समाधिस्थ होने के पश्चात, वर्तमान आचार्य समयसागर के आशीर्वाद से 'चल चरखा' और हथकरघा केंद्रों का यह पवित्र संचालन देश के विभिन्न हिस्सों में निरंतर जारी है।
नारी कोकड़ी के इस पिछड़े क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए भविष्य में भव्य दिगंबर जैन मंदिर के निर्माण के साथ-साथ बच्चों व युवाओं की शिक्षा हेतु 'प्रतिभा स्थली' के निर्माण की भी योजना है।
आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर नारी कोकड़ी में कार्य कर रही महिलाओं ने दिगम्बर जैन आदीश्वरधाम नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षायोग में मुनि आगम सागर महाराज के दर्शन को पहुंची सभी ने छत्तीसगढ़ी भाषा में सुंदर मंगलाचरण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात सभी ने आचार्य का भक्तिमय पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए। अपनी प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन कर एक नाटक के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति की। साथ को स्वयं हस्त कला से निर्मित किया गया अछार मुनि ससंघ को भेट किया।