'सीता राम चरित अति पावन' के रचयिता कौन हैं? जानिए इस भक्ति गीत का गहरा अर्थ

Posted on: 2026-08-05


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अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म **'रामायण'** का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। फिल्म के भव्य विजुअल्स, कलाकारों के लुक और प्रस्तुति की खूब सराहना हो रही है। हालांकि ट्रेलर के साथ एक और दिलचस्प ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में सोशल मीडिया यूजर्स फिल्म के ट्रेलर के बैकग्राउंड में **रामानंद सागर की 1987 की लोकप्रिय टीवी श्रृंखला 'रामायण'** का अमर भजन **'सीता राम चरित अति पावन'** जोड़कर वीडियो साझा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि नई तकनीक और बड़े बजट के बावजूद रामानंद सागर की 'रामायण' और उसके संगीत की जगह आज भी कोई नहीं ले सकता।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो में दर्शक पुराने भजन के साथ नए ट्रेलर को जोड़कर भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि आधुनिक प्रस्तुति अपनी जगह है, लेकिन रामानंद सागर की 'रामायण' के संगीत, भक्ति और भावनात्मक गहराई का मुकाबला करना आसान नहीं है। यही वजह है कि ट्रेलर रिलीज होने के बाद यह भजन एक बार फिर लोगों की जुबान पर चढ़ गया है। **'सीता राम चरित अति पावन'** रामानंद सागर की 'रामायण' का शुरुआती भजन है, जिसे प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार और गायक **रवीन्द्र जैन** ने लिखा और अपनी मधुर आवाज में गाया था। रवीन्द्र जैन भारतीय संगीत जगत का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने दृष्टिहीन होने के बावजूद अपनी प्रतिभा से संगीत की दुनिया में अमिट पहचान बनाई। उन्होंने अनेक फिल्मों और धारावाहिकों के लिए यादगार गीतों की रचना की। उनके लिखे और गाए भजन आज भी करोड़ों लोगों की आस्था का हिस्सा हैं। भारतीय कला और संगीत में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2015 में उन्हें **पद्म श्री** से सम्मानित किया गया था।
भजन के बोल आज भी लोगों के दिलों को छूते हैं। इसकी पहली पंक्ति **'सीता राम चरित अति पावन'** का अर्थ है कि माता सीता और भगवान श्रीराम का चरित्र अत्यंत पवित्र है और उनके जीवन की कथाएं मनुष्य के जीवन को पवित्रता और सदाचार की प्रेरणा देती हैं। अगली पंक्ति **'मधुर सरस और अति मन भावन'** इस बात को दर्शाती है कि श्रीराम की कथा अत्यंत मधुर, रसपूर्ण और मन को आनंद देने वाली है। भजन की एक अन्य प्रसिद्ध पंक्ति **'पुनि पुनि कितनेहू सुने सुनाये, हिय की प्यास भुजत न भुजाये'** का भावार्थ यह है कि रामकथा को चाहे कितनी भी बार सुना या सुनाया जाए, मन कभी नहीं भरता। हर बार इसे सुनने की नई इच्छा जागती है और श्रद्धा पहले से अधिक गहरी हो जाती है। यही कारण है कि दशकों बाद भी यह भजन लोगों के दिलों में उसी तरह जीवित है।

नई फिल्म के ट्रेलर के साथ इस भजन का जुड़ना केवल एक संयोग नहीं माना जा रहा, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय दर्शकों के मन में रामानंद सागर की 'रामायण' के प्रति आज भी गहरी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव है। सोशल मीडिया पर अनेक यूजर्स लिख रहे हैं कि नई फिल्म का ट्रेलर शानदार है, लेकिन पुराने भजन को सुनते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं। कई लोगों ने इसे भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे यादगार भक्ति गीत भी बताया है।

उधर, रणबीर कपूर अभिनीत नई **'रामायण'** भी लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म अपने विशाल बजट, अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स और भव्य निर्माण के कारण पहले से ही चर्चा में है। ट्रेलर के बाद दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। हालांकि सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं से यह भी साफ है कि नई पीढ़ी जहां आधुनिक प्रस्तुति को पसंद कर रही है, वहीं पुरानी पीढ़ी रामानंद सागर की 'रामायण' और उसके संगीत को आज भी आदर्श मानती है। कुल मिलाकर, रणबीर कपूर की 'रामायण' का ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही 1987 की 'रामायण' का कालजयी भजन **'सीता राम चरित अति पावन'** एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। यह भजन न केवल भारतीय संस्कृति और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सच्चा संगीत और भावपूर्ण रचनाएं समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर नई पीढ़ी के साथ फिर से जीवंत हो उठती हैं।