दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि आगम सागर ससंघ की कलश स्थापना में जबरदस्त उत्साह

Posted on: 2026-08-03


hamabani image

रायपुर । दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में नवोदय तीर्थ दिगंबर जैन आदिश्वर धाम में समययोपदेश वर्षायोग 2026 के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन अत्यंत हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया और क्षेत्र जैन धर्म के जयकारों व भक्तिमय माहौल से गूंज उठा।

नवोदय तीर्थ समयोपदेश वर्षा योग 2026 समिति के अध्यक्ष नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं कार्यकारी अध्यक्ष संजय नायक जैन ने बताया कि रविवार प्रातः 7 बजे से जिनालय की बेदी में श्रीजी का अभिषेक शांति धारा की गई। श्रीजी के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य प्रीतम कुमार जैन, श्रद्धेय जैन (विक्की), नवीन मोदी, पुष्पेंद्र जैन (टिल्लू) एवं विनय जैन परिवारों को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात प्रथम शांतिधारा जीवन लाल जैन एवं पुष्पेंद्र कुमार जैन (टैगोर नगर, रायपुर) तथा द्वितीय शांतिधारा विनय कुमार जैन (C.A.) द्वारा संपन्न की गई।

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में मंदिर परिसर एवं मंडप में ध्वजारोहण करने का सौभाग्य राजकुमार जैन व श्रीमती शकुंतला जैन, नवीन जैन व श्रीमती कविता जैन, नमन जैन व श्रीमती आशिका जैन तथा कु. आस्था जैन (मोदी परिवार, टैगोर नगर, रायपुर) को प्राप्त हुआ।

मुनि संघ की आहारचर्या में नवधाभक्ति पूर्वक आहार देने का सौभाग्य मुनि आगम सागर के लिए श्रीमती रोहिता पुष्पेंद्र जैन, मुनि पुनीत सागर के लिए श्रीमती रुचि श्रेयश जैन, एलक धैर्य सागर के लिए श्रीमती पुष्पा बंशीलाल जैन, और एलक स्वागत सागर के लिए श्रीमती रेखा रमेश जैन ने पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

दोपहर 1 बजे कलश स्थापना कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। इस दौरान महिला मंडल द्वारा आचार्यश्री पूजन में संगीतमय भजनों की प्रस्तुति देते हुए नृत्य के साथ अष्ट द्रव्य चढ़ाए गए। सभी मंदिर के अध्यक्षों एवं कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा भी श्रद्धापूर्वक अर्घ्य समर्पित किए गए। इसके पश्चात महिला मंडल द्वारा विभिन्न आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसने सभी का मन मोह लिया।

मुनि आगम सागर की मंगल देशना
कार्यक्रम के दौरान मुनि आगम सागर ने अपनी मंगल देशना में बताया कि मालवीय रोड स्थित इस लगभग 150 वर्ष पुराने अतिशयकारी प्राचीन मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसे 'लघु तीर्थ' बनाने की अंतिम देशना संत शिरोमणि समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महामुनिराज ने अपने रायपुर प्रवास के दौरान दी थी। डोंगरगढ़ में उत्कृष्ट यम समाधि प्राप्त करने वाले आचार्यश्री द्वारा अपने अंतिम समय में इस नवीन जिनालय 'लघु तीर्थ' के निर्माण का मंगल आशीर्वाद मिलना रायपुर समाज के लिए परम सौभाग्य की बात है।

उन्होंने आगे कहा कि ऊंचे शिखर का 3 मंजिला भव्य मंदिर, त्रिकाल चौबीसी और सहस्रकूट जिनालय, संत निवास एवं सर्वसुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग और एक सुंदर गार्डन का ऐसा निर्माण इसकी सुंदरता में चार चांद लगाएगा। इस निमित्त हमारे वर्तमानाचार्य समय सागर महाराज ने हमें इस निर्माण को प्रारंभ करने हेतु भेजा है। अब पूरे समाज और हम सभी का यह दायित्व है कि इस कार्य को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, क्योंकि आचार्य विद्यासागर महाराज के वचन कभी खाली नहीं जाते।