इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) के वर्ष 2024-26 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत-गृह में आयोजित किया गया। समारोह में कुल 111 परिवीक्षार्थियों ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर पास आउट किया। इनमें 21 महिला प्रशिक्षु और भूटान के दो विदेशी प्रशिक्षु भी शामिल हैं।
समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नवदीक्षित अधिकारियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और सतत विकास के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर राष्ट्र सेवा करने का आह्वान किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय वन सेवा अधिकारी देश की प्राकृतिक धरोहर की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अधिकारियों से नैतिकता, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक तकनीक के समन्वय के साथ कार्य करने की अपील करते हुए कहा कि एक सफल वन अधिकारी के लिए केवल प्रशासनिक दक्षता ही नहीं, बल्कि सेवा भावना और नैतिक मूल्यों का होना भी आवश्यक है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि महात्मा गांधी ने अपने जीवन में नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया था। उन्होंने अधिकारियों से चुनौतियों का सामना करते हुए अधिकारों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखने तथा केवल नेतृत्वकर्ता ही नहीं, बल्कि विचारों के प्रेरणास्रोत बनने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है और वन सेवा को और अधिक सशक्त और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निष्ठा, ईमानदारी और निर्भीकता के साथ राष्ट्र सेवा करेंगे।
उन्होंने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी, अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और आज डेटा आधारित तकनीकें समय की आवश्यकता बन चुकी हैं। हालांकि, किसी भी तकनीक से अधिक महत्वपूर्ण अधिकारी की निर्णय क्षमता, कार्यकुशलता और प्रदर्शन है।
प्रशिक्षण बैच में सबसे अधिक 11 अधिकारी मध्य प्रदेश कैडर को आवंटित किए गए हैं, जबकि उत्तराखंड को पांच नए भारतीय वन सेवा अधिकारी मिले हैं। समारोह के दौरान प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि वर्ष 1938 में स्थापित यह संस्थान, जो पहले इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज के नाम से जाना जाता था, वर्तमान में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के रूप में कार्यरत है। पिछले 88 वर्षों में इस संस्थान ने स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों के साथ-साथ 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया है।
समारोह के अंत में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारतीय वन सेवा के नवदीक्षित अधिकारी अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निष्ठा, ईमानदारी और निर्भीकता के साथ देश की प्राकृतिक संपदा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।