आईटीबीपी 53वीं वाहिनी ने सात माह की गर्भवती महिला काे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया

Posted on: 2026-07-25


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जिले के अबूझमाड़ के दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे ग्राम धुरबेड़ा से आज शनिवार सुबह भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की 53वीं वाहिनी ने एक बार फिर मानवता और जनसेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। लगातार हो रही बारिश, उफनते नाले, घने जंगल और फिसलन भरे पहाड़ी रास्तों के बीच आईटीबीपी और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने सात माह की गर्भवती महिला काे कई किलोमीटर तक पैदल चलकर सुरक्षित कर उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया।

मिली जानकारी के अनुसार धुरबेड़ा निवासी 22 वर्षीय सुधा मांडवी, पति लालसू मांडवी, जो सात माह की गर्भवती हैं, को शनिवार सुबह अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। धुरबेड़ा जैसे सुदूर वनांचल क्षेत्र में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों की चिंता बढ़ गई। इसी बीच आईटीबीपी 53वीं वाहिनी के अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी गई । सेनानी संजय कुमार के मार्गदर्शन में आईटीबीपी ने तुरंत राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद सीओबी आदिंगपार और कोडेनार से जवानों की दो अलग-अलग टीमें गठित कर धुरबेड़ा के लिए रवाना किया गया।

आईटीबीपी और जिला पुलिस के जवानों ने साहस, धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए दुर्गम रास्तों को पार किया और धुरबेड़ा गांव पहुंचे। महिला की स्थिति को देखते हुए जवानों ने अत्यंत सावधानी के साथ उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाया और कई किलोमीटर तक पैदल चलकर सुरक्षित बाहर निकाला। कठिन परिस्थितियों के बीच महिला को कुतुल स्थित आईटीबीपी के फील्ड अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद बेहतर उपचार के लिए उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया।

चिकित्सकों के अनुसार समय पर रेस्क्यू होने से महिला और गर्भस्थ शिशु दोनों सुरक्षित हैं। धुरबेड़ा क्षेत्र कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। दशकों तक यह इलाका नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा, जहां प्रशासन और आम लोगों की पहुंच बेहद सीमित थी। लेकिन सुरक्ष बलों के लगातार अभियान, सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और प्रशासन की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण आज यह क्षेत्र तेजी से मुख्यधारा से जुड़ रहा है। अब यहां सुरक्षाबल केवल नक्सल विरोधी अभियान ही नहीं चला रहे, बल्कि जरूरतमंद ग्रामीणों की हर संभव सहायता कर उनके बीच विश्वास भी मजबूत कर रहे हैं। इस मानवीय पहल की स्थानीय ग्रामीणों ने सराहना करते हुए आईटीबीपी और जिला पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। आईटीबीपी 53वीं वाहिनी की त्वरित कार्रवाई, साहस और समर्पण ने एक गर्भवती महिला की जान बचाने के साथ-साथ क्षेत्र के लोगों का सुरक्षाबलाें पर विश्वास भी मजबूत किया है।