जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री लावरोव से की मुलाकात, भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई चिंता

Posted on: 2026-07-22


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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। ब्लैक सी में हुए मिसाइल हमले में चार भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली उच्चस्तरीय बैठक थी। बातचीत में भारतीय नाविकों की सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर जताई गंभीर चिंता

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत की गंभीर चिंता दोहराई। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

ब्लैक सी हमले में चार भारतीयों की हुई थी मौत

19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हो रहे वाणिज्यिक जहाज एमवी गोल्डन लियो पर रूसी मिसाइल गिरने से चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। हमले में एक भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि जहाज पर सवार कुल 17 क्रू मेंबरों में पांच भारतीय शामिल थे।

रूस के राजनयिक को किया गया था तलब

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने रूस के चार्ज डी’ अफेयर्स को तलब कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। मंत्रालय ने कहा था कि भारत वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा करता है। साथ ही स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिक क्रू की जान जोखिम में डालना तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा पहुंचाना अस्वीकार्य है और इससे बचा जाना चाहिए।

कीव पोस्ट की रिपोर्ट में 10 लोगों की मौत का दावा

कीव पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, तुर्किए के मालवाहक जहाज गोल्डन लियो पर हुए रूसी मिसाइल हमले में कुल 10 लोगों की मौत हुई। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस घटना के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है।

आसियान बैठकों में भाग लेने मनीला पहुंचे लावरोव

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) से जुड़ी वार्षिक बैठकों में भाग लेने के लिए मनीला पहुंचे हैं। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के बीच एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रूस के राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करना बताया जा रहा है।