बस्तर गाेंचा में 16 जुलाई काे भगवान के 22 विग्रहों के साथ श्रीगाेंचा रथयात्रा की परम्परा का हाेगा निर्वहन

Posted on: 2026-07-14


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छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में स्थित जगदलपुर का ऐतिहासिक श्रीजगन्नाथ मंदिर अपनी अद्भुत धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के कारण देशभर में विशेष पहचान रखता है। इस मंदिर में भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, बलभद्र और सुभद्रा देवी सहित कुल 22 विग्रह एक ही परिसर के छह अलग-अलग खंडों में विराजमान हैं। इन सभी विग्रहों की एक साथ पूजा-अर्चना और तीन रथों में रथारूढ़ कर निकाली जाने वाली श्रीगोंचा रथयात्रा को विश्व की अनूठी धार्मिक परंपराओं में शामिल माना जाता है।

360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के

पूर्व अध्यक्ष ईश्वर खंखारी ने 22 प्रतिमाओं के एक ही मंदिर में पूजा होने के पीछे का राेचक प्रसंग के बारे में बताते हुए कहा कि जब

वर्ष 1408 में राजपरिवार के साथ जिन 360 घर आरण्यक ब्राह्मण परिवारों

को लाकर बस्तर में बसाया गया, वे अपने साथ ओडि़सा से भगवान श्रीजगन्नाथ स्वामी, बलभद्र व सुभद्रा देवी की

मूर्तियां लेकर आए। भगवान के विग्रहों के साथ बस्तर अंचल में आकर बस गए और अपने

आराध्य की पूजा-अर्चना करते रहे । इस दाैरान रियासत कालीन राजाओं की राजधानी जब जगदलपुर स्थानांतरित हुयी, तब वर्तमान श्रीजगन्नाथ मंदिर के

समीप घांस फूस से निर्मित मंदिर का निर्माण करके पूजा-अर्चना की जाती थी।कुछ समय

पश्चात उस मंदिर में आग लग जाने से मंदिर पूरी तरह नष्ट हो गया ।

इस घटना के बाद राजा ने

समीप ही श्रीजगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया ।