नई दिल्ली, 06 जून । स्थानीय स्वशासन और राजकोषीय विकेंद्रीकरण को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक डेटासेट पर गठित विशेष समिति की रिपोर्ट आगामी 8 जून को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में जारी की जाएगी। इस रिपोर्ट का उद्देश्य राज्य वित्त आयोगों को अधिक प्रभावी, सटीक और डेटा-संचालित सिफारिशें तैयार करने में सहायता करना है।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट का विमोचन केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन करेंगे। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, संवैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और आर्थिक शोधकर्ता भी मौजूद रहेंगे।
इस अवसर पर मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. नागेश्वरन सशक्त स्थानीय स्वशासन, समावेशी विकास और साक्ष्य-आधारित राजकोषीय प्रशासन की आवश्यकता पर अपने विचार रखेंगे। वे नीति निर्माण में विश्वसनीय आंकड़ों की भूमिका और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया के महत्व को भी रेखांकित करेंगे।
गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 243-आई के तहत गठित राज्य वित्त आयोगों का दायित्व पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना तथा स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण के लिए आवश्यक सिद्धांतों की सिफारिश करना है। इस संवैधानिक जिम्मेदारी का प्रभावी निर्वहन करने के लिए आयोगों को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विश्वसनीय और व्यापक आंकड़ों की आवश्यकता होती है।
इन आंकड़ों में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोत, जनसांख्यिकीय जानकारी, बुनियादी ढांचा, सार्वजनिक सेवाओं की उपलब्धता तथा परिसंपत्ति प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। हालांकि विभिन्न विभागों और संस्थानों में बिखरे हुए डेटा तक समय पर पहुंच न होने के कारण आयोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
विशेष समिति की यह रिपोर्ट राज्य वित्त आयोगों के लिए आवश्यक प्रमुख डेटासेट का एक व्यापक और संरचित खाका प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में डेटा संग्रहण, मानकीकरण और उपलब्धता को बेहतर बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं। इनमें विभिन्न सरकारी विभागों के बीच डेटा साझाकरण की व्यवस्था को सरल बनाना, आंकड़ों को एक समान प्रारूप में उपलब्ध कराना तथा समग्र डेटा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना शामिल है।
मंत्रालय का मानना है कि यह रिपोर्ट राज्य सरकारों, वित्त आयोगों, संवैधानिक निकायों और आर्थिक शोधकर्ताओं के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक दस्तावेज साबित होगी। साथ ही यह स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन और संसाधन आवंटन को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने में भी मदद करेगी।
उल्लेखनीय है कि नवंबर 2024 में 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में ‘विकास के लिए हस्तांतरण’ विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में यह चिंता सामने आई थी कि विभिन्न विभागों में उपलब्ध आंकड़ों तक समुचित पहुंच न होने से राज्य वित्त आयोगों की सिफारिशों की गुणवत्ता और समयबद्धता प्रभावित होती है। इसी चुनौती के समाधान के लिए पंचायती राज मंत्रालय ने इस विशेष समिति का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट अब सार्वजनिक की जा रही है।