कंठी वाले बाबा से मर्दापाल के ग्रामीणाें ने तुलसी की कंठी माला ग्रहण कर दीक्षा ली

Posted on: 2026-05-20


hamabani image

जगदलपुर, 20 मई । बस्तर जिले के रामपुर आश्रम चपका के बाबा बिहारी दास महाराज के सुपुत्र शंकर दास महराज के द्वारा आज बुधवार काे मर्दापाल क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के लोगों ने कंठी माला तुलसी माला ग्रहण कर दीक्षा दी गई ।

इस दाैरान मर्दापाल में भजन कीर्तन एवं यज्ञ में क्षेत्र में राममय वातावण बना रहा लगातार ग्रामीण अंचल मे लोग भक्ति से जुड़कर हरे रामा हरे रामा रामा हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा हरे हरे का जाप करते रहे । छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित ग्राम चपका के 'बाबा बिहारी दास महाराज' (जिन्हें कंठी वाले बाबा भी कहा जाता है) ने 1970 के दशक में बस्तर में लगभग 9 लाख आदिवासियों को मांस-मदिरा छोड़ने और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है।

बाबा बिहारी दास जी की तपोभूमि 'श्रीरामपुर आश्रम' चपका (जिला बस्तर) में स्थित है। यह स्थान जगदलपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 पर स्थित है। चपका में एक बेहद प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर है। मान्यता है कि महर्षि मार्कण्डेय ने यहीं घोर तपस्या की थी। मंदिर के शिवलिंग को गले लगाकर या बाहों में भरकर महाकाल से दीर्घायु होने की कामना करने की परंपरा है। कंठी वाले बाबा ने आदिवासियों और स्थानीय लोगों को कंठी धारण करवाकर सात्विक जीवन अपनाने का संदेश दिया। 1960 और 1970 के दशक में बस्तर के आदिवासियों के बीच हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म का प्रभाव बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा योगदान था। महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय विशाल मेला और रामनवमी के अवसर पर नौ दिवसीय यज्ञ आयोजित किया जाता है। बाबा बिहारी दास महाराज के ब्रह्मलीन होने के बाद, उनके सुपुत्र 'शंकर दास महाराज' इस आश्रम का संचालन कर रहे हैं।