रायपुर, 01 मई । छत्तीसगढ़ में में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से आज से सुशासन तिहार की शुरुआत हो गई है। इस 40-दिवसीय महाभियान के तहत 10 जून तक ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जहां लोगों की शिकायतों का मौके पर ही निराकरण किया जाएगा।
यह अभियान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जन समस्या निवारण शिविरों के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुँचाने पर केंद्रित है।आज पहले दिन महासमुंद, कवर्धा, सुकमा, रायपुर, रायगढ़ और बिलासपुर जैसे कई जिलों में विभिन्न स्थानों पर समाधान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं जिलों का आकस्मिक दौरा कर विकास कार्यों का निरीक्षण करेंगे। हितग्राहियों से फीडबैक और समीक्षा बैठकें आयोजित करेंगे।मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जन शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शी और सरल प्रशासन ही सुशासन की पहचान है।
अभियान के प्रारंभिक चरण में प्रशासन को 30 अप्रैल तक सभी लंबित मामलों के निराकरण के निर्देश दिए गए थे। इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं।नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व प्रकरण के तहत मनरेगा मजदूरी का भुगतान, हितग्राही योजनाओं की लंबित राशि, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, बिजली, ट्रांसफार्मर और पेयजल (हैंडपंप) से जुड़ी समस्याएं, इसके साथ ही पात्र लोगों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ दिलाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून तक शिविर आयोजित किए जाएंगे, ग्रामीण क्षेत्रों में 15–20 ग्राम पंचायतों के समूह में शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर मौके पर ही आवेदन और समाधान करेंगे। अधिकतम एक माह में शिकायतों का निपटारा भी करेंगे, शिविरों में योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ आवेदकों को उनके आवेदन की स्थिति भी बताई जाएगी।
इस अभियान में मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी लगातार शिविरों का निरीक्षण करेंगे। आम जनता से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझा जाएगा और मौके पर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार ने इस अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। जनसम्पर्क विभाग डिजिटल, प्रिंट और स्थानीय माध्यमों के जरिए इसका प्रचार-प्रसार करेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस पहल का लाभ उठा सकें।