नई दिल्ली, 29 अप्रैल केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बावजूद अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में देश के निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे भारत के निर्यात व्यापार में मज़बूती और निर्यातकों के बीच बढ़ता भरोसा साफ दिखाई देता है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने नई दिल्ली में 'जलवायु परिवर्तन के साथ लचीलेपन को आगे बढ़ाना' विषय पर एक चर्चा के दौरान यह बात कही। गोयल ने संवाददाताओं को बताया कि अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में निर्यात के आंकड़े पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी बढ़े हैं। उन्होंने इस बढ़ोतरी का श्रेय वैश्विक मांग में सुधार और नए व्यापार समझौतों को दिया, जिनसे भारतीय सामानों के लिए बाजार तक पहुंच बढ़ रही है।
गोयल ने यह भी कहा कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) घरेलू उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन देंगे। पश्चिम एशिया को निर्यात के बारे में उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य चुनौती बना हुआ है इसलिए माल भेजने के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत की प्रगति के बारे में मंत्री ने कहा, “करीब एक सप्ताह पहले हमारी बहुत अच्छी चर्चा हुई थी। हमारा प्रतिनिधिमंडल लौट आया है और बातचीत जारी है।”
उन्होंने बताया कि सरकार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, चार यूरोपीय देशों के समूह ईएफटीए (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ), ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और ओमान के साथ व्यापार समझौते अंतिम रूप दे चुकी है। गोयल ने कहा, “करीब 12 अन्य समझौते भी प्रक्रिया में हैं।” भारत इजराइल, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और कनाडा के साथ भी व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है।
इससे पहले पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित ‘जलवायु परिवर्तन के साथ लचीलेपन को बढ़ावा’ संवाद में मुख्य भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने जलवायु कार्रवाई में एक वैश्विक नेता के रूप में भारत के उभरने, ‘इच्छित राष्ट्रीय निर्धारित योगदान’ (आईएनडीसी) को प्राप्त करने में इसके सशक्त प्रदर्शन, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के तीव्र विस्तार तथा विभिन्न देशों एवं क्षेत्रों के साथ जारी वैश्विक आर्थिक जुड़ावों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारत के निर्यात में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अपने आईएनडीसी को हासिल करने के मामले में दुनिया के सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक है और जी20 देशों में लगातार टॉप 1–3 देशों में अपनी जगह बनाए हुए है। उन्होंने यह भी बताया कि देश ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्य तय समय से आठ साल पहले ही हासिल कर लिए हैं और अब तक 260 गीगावॉट की क्षमता हासिल की जा चुकी है।
गोयल ने याद दिलाया कि जब 2014 में सरकार सत्ता में आई थी तो पिछली योजना के तहत 9-10 सालों में 20 गीगावॉट की सोलर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में इस लक्ष्य को बढ़ाकर 100 गीगावॉट कर दिया गया और तय समय के भीतर ही इसे हासिल भी कर लिया गया। उन्होंने कहा कि अब भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट की क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
पेरिस सीओपी21 में भारत की अगुवाई को याद करते हुए गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकसित, विकासशील और कम विकसित देशों को एक साथ लाकर एक आम सहमति वाला नतीजा हासिल किया, जिससे देशों को अपने लक्ष्य खुद तय करने की छूट मिली। उन्होंने बताया कि भारत जिसे पहले एक 'नकारने वाले' देश के तौर पर देखा जाता था, अब एक वैश्विक नेता बन गया है।