जेपीएससी मामले में सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, लिखित जवाब दे सरकार : पीयूष कुमार

Posted on: 2026-08-08


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रांची, 08 अगस्त। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र-अभ्यर्थियों की ओर से सरकार से वार्ता करने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्य पीयूष कुमार ने शनिवार को कहा कि लगातार परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं से खासकर गरीब और मेहनतकश छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। उन्होंने कहा कि इसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में पीयूष कुमार ने कहा कि छात्र-अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं, लेकिन सरकार की ओर से लगातार केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा और सरकार को छात्रों की मांगों पर लिखित जवाब देना होगा।

पीयूष ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में संबंधित जेपीएससी परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराना और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करना शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसी टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 14वीं, 13वीं और 11वीं जेपीएससी सीजीएल सहित संबंधित अन्य परीक्षाओं की भी जांच होनी चाहिए। इन परीक्षाओं से जुड़े मामलों में जिन लोगों की संलिप्तता सामने आती है, उनकी उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

पीयूष कुमार ने कहा कि यदि मामले में प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराई जानी चाहिए, जबकि वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के माध्यम से जांच होनी चाहिए।

पीयूष ने कहा कि छात्र-अभ्यर्थियों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार भी शामिल है। उन्होंने आयु सीमा में छूट, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की।

पीयूष ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों का भरोसा बना रहे और किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे। इसके लिए परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में आवश्यक संस्थागत सुधार लागू किए जाने चाहिए।

पीयूष कुमार ने कहा कि सरकार की ओर से मांगों पर लिखित जवाब मिलने तक अनशन और आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर अब केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने छात्रों से 10 अगस्त को प्रस्तावित विधानसभा घेराव-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक छात्रों की भागीदारी से छात्रहित की आवाज को मजबूती मिलेगी और सरकार पर उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने का दबाव बनेगा।