राजधानी रायपुर के सिविल लाइन क्षेत्र स्थित सीए तारवानी एंड एसोसिएट्स कार्यालय में हुई लाखों रुपये की चोरी का पुलिस ने गुरुवार को महज 30 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से चोरी की 7.80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले का मुख्य आरोपित उमेश पोर्ते है, जो पहले इसी कार्यालय में कार्यरत था। नौकरी छोड़ने के बाद भी उसे कार्यालय में रखी जाने वाली नकदी की जानकारी थी। इसी का फायदा उठाते हुए उसने अपने साथी लक्ष्मीनारायण ध्रुव के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
जानकारी के मुताबिक, सीए तारवानी एंड एसोसिएट्स में कैशियर के पद पर कार्यरत अपर्णा नायक ने थाना सिविल लाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि, 21 जुलाई 2026 की सुबह कार्यालय के चालक ने फोन कर ऑफिस में चोरी होने की सूचना दी। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि अज्ञात बदमाश रात में कार्यालय में घुसकर कैश काउंटर का लॉक कटर से काटकर उसमें रखी नकदी लेकर फरार हो गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला और पुलिस उपायुक्त (मध्य/सेंट्रल जोन) तारकेश्वर पटेल के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट तथा सिविल लाइन थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, कर्मचारियों और आसपास के लोगों से पूछताछ की तथा सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
जांच के दौरान पुलिस को कार्यालय में पहले काम कर चुके कर्मचारी उमेश पोर्ते पर संदेह हुआ। उसे बिलासपुर से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपराध स्वीकार कर लिया। आरोपित ने बताया कि, उसने पहले से बनाई गई योजना के तहत अपने साथी लक्ष्मीनारायण ध्रुव के साथ मिलकर चोरी की थी। इसके बाद दूसरे आरोपित को भी बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपितों के कब्जे से चोरी की 7 लाख 80 हजार रुपये की नकदी बरामद कर ली है। दोनों के खिलाफ थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 388/26 के तहत धारा 331(4) एवं 305 बीएनएस के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपित उमेश पोर्ते पूर्व में भी मारपीट के मामलों में बिलासपुर जेल जा चुका है।